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स्पेशल रिपोर्ट: पाक से वार्ता- भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं, ट्रैक-टू डायलाग सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा

India-Pak Flag

नई दिल्ली। पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए ट्रैक-टू डायलाग को भारत ने सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया है और कहा है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत को लेकर भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।





जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर दोनों सेनाओं के बीच पिछले कुछ सालों से तनातनी बढ़ने के बीच भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालयों की इस पहल ने सामरिक हलकों का ध्यान खींचा है। पिछले सप्ताह हुई इस बातचीत को दोनों देशों की सरकारों की ओर से आशीर्वाद हासिल था और यह बातचीत भी अत्यधिक गोपनीय माहौल में हुई थी। इस बातचीत के नतीजों के बारे में दोनों देशों के शिष्टमंडल अपनी-अपनी सरकारों को रिपोर्ट सौंपेंगे। भारतीय शिष्टमंडल की अगुवाई विदेश मंत्रालय में पूर्व सचिव विवेक काटजू कर रहे थे।

ट्रैक-टू डायलाग एक अनौपचारिक गैर सरकारी बातचीत

नीमराना डायलाग के तहत आयोजित ट्रैक–टू डायलाग के बारे में पूछे जाने पर यहां विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि पाकिस्तान से बातचीत के बारे में भारत का रुख बरकरार है। भारत ने कई बार कहा है कि आंतक के साथ-साथ बातचीत नहीं चल सकती। लेकिन यहां राजनयिक पर्यवेक्षकों ने कहा कि ट्रैक-टू डायलाग एक अनौपचारिक गैर सरकारी बातचीत है जिसमें दोनों देशों के सरकारी प्रतिनिधि भाग नहीं लेते। इसलिये इनकी बैठक के नतीजों को किसी पक्ष पर लागू नहीं किया जा सकता। ट्रैक-टू डायलाग के जरिये दोनों देशों के प्रतिनिधि अपने विचार खुल कर रखते हैं और दो टूक बातचीत होती है।

दोनों देशों के बीच इस तरह की अनौपचारिक बातचीत को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दोनों देशों के नागरिक समाज के बीच हुई बातचीत करार दिया। पर्यवेक्षकों के मुताबिक कुछ साल पहले तक इस तरह की अनौपचारिक बातचीत दोनों देशों के यहां नियमित तौर पर होती रही है लेकिन पिछले सप्ताह हुई बातचीत लम्बे अर्से के बाद हुई इसलिये सामरिक हलकों में इस बातचीत पर हैरानी हुई। पर्यवेक्षकों का कहना है कि दोनों देश आपसी आधिकारिक बातचीत का आधार तैयार कर रहे हैं लेकिन प्रवक्ता ने इससे इनकार किया।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के बीच निकट भविष्य में औपचारिक वार्ता बहाल होने की सम्भावना नहीं है क्योंकि पाकिस्तान में आगामी जुलाई में संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं और अगले साल अप्रैल में भारत में संसदीय चुनाव होंगे। इसलिये दोनों देशों में नई सरकार को स्थिरता मिलने के बाद ही बातचीत की बहाली की कोई उम्मीद की जा सकती है।

भारतीय पक्ष यह भी देखेगा कि पाकिस्तान में जो जनतांत्रिक सरकार सत्ता ग्रहण करेगी वह पाकिस्तानी सेना से कितना स्वतंत्र है। पाकिस्तान की नई सरकार की पाकिस्तान की सेना की नजर में क्या अहमियत है भारत की ओर से इसका भी आकलन किया जाएगा तभी पाकिस्तान की चुनी हुई सरकार के साथ भारत ठोस बातचीत को तैयार हो सकता है।

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