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गुमनामी की दुनिया से बाहर आया 69 साल का फौजी बॉक्सर, लड़ेगा नहीं अब लड़ाएगा

संगरूर: 1980 के दशक में एशियाई मुक्केबाजी की दुनिया में जिस शख्स की तूती बोलती थी… अमिताभ बच्चन जैसा सुपरस्टार उसका मुरीद था… विश्व चैंपियन मुहम्मद अली ने जिससे दो-दो हाथ किए हों और फिर गुमनामी की दुनिया में खो गया हो, वह बॉक्सर एक बार फिर से रिंग में उतरने की तैयारी में है लेकिन लड़ने के लिए नहीं बल्कि लड़ाने के लिए।





1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में सक्रिय रूप से भाग लिया

कौर सिंह की जवानी की फोटो

कौर सिंह जिन्हें आज लोग प्यार से ‘कौरा फ़ौजी’ के नाम से बुलाते हैं

इस बॉक्सर का नाम है कौर सिंह। कौर सिंह महज बॉक्सर भर नहीं रहे बल्कि वह योद्धा भी हैं। भारतीय सैनिक के रूप में उन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में सक्रिय रूप से भाग लिया और उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल (1988) से नवाजा गया। उनके गृह नगर और आसपास के लोग उन्हें ‘कौरा फौजी’ के नाम से जानते हैं। ‘कौरा फौजी’ की उम्र आज 69 साल है। उन्हें हाल में भारतीय पेशेवर मुक्केबाजी संगठन (PBOI) ने युवा प्रतिभाओं को तलाशने के लिए अपने साथ जोड़ा है। मजे की बात यह है कि ‘कौरा फौजी’ को नहीं मालूम कि PBOI है क्या चीज?

कौर सिंह

कौर सिंह अर्जुन अवार्ड के साथ। उन्हें पद्म विभूषण से भी नवाजा जा चुका है

अगर आपको 1982 के एशियाई खेलों की याद हो तो हैवीवेट डिवीजन के फाइनल में इराक के इस्माइल खलील को 34 साल के जिस भारतीय बॉक्सर ने पटखनी दी थी वह कोई और नहीं बल्कि ‘कौरा फौजी’ ही थे। उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। अगले दिन अखबारों में जो फोटो छपी उसमें अमिताभ बच्चन ‘कौरा फौजी’ के साथ बिल्कुल बॉक्सर के अंदाज में पोज दे रहे थे।

मुहम्मद अली से कर चुके हैं दो-दो हाथ

कौर सिंह

बॉक्सर मोहम्मद अली (बाएं) और कौर सिंह (दाएं)

हालांकि, ‘कौरा फौजी’ का नाम पहले से ही था। एशियाई खेलों से दो साल पूर्व ‘कौरा फौजी’ उस समय अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा मशहूर मुहम्मद अली से न सिर्फ मिल चुके थे बल्कि उनके साथ 1980 में दिल्ली में एक प्रदर्शनी मैच में चार राउंड मुकाबला भी किया था।

1980 के दशक के बाद वह लाइमलाइट से दूर हो गए। लेकिन अब वह वापसी कर रहे हैं लेकिन ‘गुरू’ के रूप में। यद्यपि वह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं लेकिन बाक्सिंग को प्रमोट करने का उन्हें जो अवसर मिल रहा है, उसे लेकर बेहद उत्साहित और रोमांचित हैं।

बॉक्सर कौर सिंह

बॉक्सर कौर सिंह के साथ अमिताभ बच्चन पोज देते हुए

उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले कुछ लोग मुझे मिलने आए थे। उन्होंने मुझसे मदद करने को कहा, और मैंने उन्हें वादा कर दिया कि मुझसे बाक्सिंग को प्रमोट करने के लिए जो बन पड़ेगा, करूंगा। PBOI के लोग मेरे गांव खनल खुर्द (संगरूर जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर) आए थे।

युवाओं पर क्या बोले ‘कौरा फौजी’

1982 में अर्जुन अवार्ड और 1983 में पद्मश्री से सम्मानित ‘कौरा फौजी’ अपने इलाके में युवाओं को खेलों के प्रति उत्साहित करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल हार्ट सर्जरी होने के बाद से मेरी सेहत में गिरावट आई है। मोहाली हास्पिटल में मेरा इलाज चल रहा है। चूंकि यह खेल मेरी जिन्दगी का अहम हिस्सा है तो खराब सेहत के बावजूद मैं बाक्सिंग को प्रोत्साहित करने के लिए देश के किसी भी हिस्से में जाने को तैयार हूं।

‘कौरा फौजी’ रौ में बोलते हैं, ‘आज का युवा खेलों में छोटी सी उपलब्धि पाकर खुद को हीरो समझने लगता है। लेकिन कुछ प्रतियोगिताएं जीत लेने के बाद ये युवा अपने प्रदर्शन को दोहराने में नाकाम रहते हैं क्योंकि उनमें अनुशासन की कमी है।’

बताया अनुशासन का मतलब

तभी उन्हें अपना समय याद आया और बोले, ‘मैं लगातार प्रदर्शन कर पाया क्योंकि मैं सेना में था, जहां अनुशासन सबसे पहले है।’ ‘कौरा फौजी’ ने अपने इसी जज्बे के साथ रिटायरमेंट के बाद पंजाब पुलिस के जवानों के प्रशिक्षित किया था।

सेना से शिकायत भी

सेना के लिए ‘कौरा फौजी’ के मन में बेहद सम्मान है लेकिन रंज भी कि ‘सरकार’ ने उनके लिए ज्यादा नहीं किया, वस्तुत: खेल के लिए। उन्होंने कहा कि मैंने अब एक लाख रुपए का वह इनाम पाने की आस छोड़ दी है जिसको देने की घोषणा पंजाब सरकार ने 1982 में की थी। शिकायती लहजे में कहते हैं कि सरकारों ने बाक्सिंग के लिए कुछ नहीं किया। मुझे इस संगठन (PBOI) से कुछ करने की उम्मीद है।

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