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स्पेशल रिपोर्ट: करतारपुर गलियारा क्या भारत-पाक रिश्तों में तनाव कम करेगा ?

करतारपुर साहेब गुरुद्वारा
करतारपुर साहेब गुरुद्वारा (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। क्या करतारपुर गलियारा का निर्माण भारत और पाकिस्तान के बीच शांति और सौहार्द के रिश्तों के नये युग की शुरुआत करेगा ? हालांकि भारतीय कैबिनेट ने करतारपुर साहब गुरुद्वारा तक जाने के लिये भारतीय सीमा तक गलियारा बनाने का ऐलान 22  नवम्बर को किया। पाकिस्तान के एक अखबार में एक दिन पहले ही यह प्रकाशित हो चुका था कि करतारपुर साहिब गुरुद्वारा से भारतीय सीमा तक के लिये अढ़ाई किलोमीटर का मार्ग का शिलान्यास पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान जल्द करेंगे।





जहां एक और भारत-पाक सीमा पर गोलियां बरसाई जा रही हैं वहीं पंजाब सीमा पर सद्भाव पैदा करने वाला यह कदम भारत औऱ पाकिस्तान के बीच परस्पर  विश्वास पैदा करने का जरिया बन सकता  है। हालांकि करतारपुर साहेब तक गलियारा बनाने का भारत का करीब दो दशक पुराना प्रस्ताव है लेकिन इसे नये सिरे से पाकिस्तान ने तब उछाला जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी औऱ कांग्रेस नेता  नवजोत सिंह सिद्धू अगस्त में  इस्लामाबाद गए थे । वहीं पाकिस्तान के थलसेना प्रमुख जनरल बाजवा ने सिद्धू से गले लगने के बाद पाकिस्तान की ओर से यह पेशकश की थी।

भारत के सिख समुदाय के लोग अब तक करतारपुर गुरुद्वारे का दर्शन भारतीय सीमा पर लगी दूरबीन से ही करते थे। अब उन्हें  पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नरोवल जिले में स्थित गुरुद्वारे तक बिना वीजा लिये जाने की अनुमति मिलेगी। यह सीमा भारतीय पंजाब प्रांत के  गुरुदासपुर जिले से डेराबाबा नानक से लगी है।

गुरुद्वारा दरबार साहब, करतारपुर पाकिस्तान में रावी नदी के तट पर स्थित है।  गलियारा बनाने का फैसला गुरु नानक  देव की 550 वीं वर्षगांठ पर लिया गया है।

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