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स्पेशल रिपोर्ट: मालदीव से रिश्ते अब पटरी पर, मोदी जाएंगे माले

पीएम मोदी

नई दिल्ली। भारत के लिये सामरिक महत्व के द्वीप देश मालदीव में जनतंत्र की वापसी और वहां चीन के पिट्ठू समझे जाने वाले राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के सत्ताच्युत होने के बाद भारत औऱ मालदीव के रिश्ते छह साल बाद फिर से पटरी पर आएंगे।





मालदीव में एसेम्बली के चुनावों के बाद राष्ट्रपति पद के लिये विजयी घोषित प्रत्याशी इब्राहीम सोलेह के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शरीक होने का ऐलान यहां विदेश मंत्रालय ने किया। प्रधानमंत्री मोदी १७ नवम्बर को मालदीव की राजधानी माले जाएंगे और उसी शाम स्वदेश लौट आएंगे। यह ऐलान करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ किया कि प्रधानमंत्री मोदी का माले दौरा दि्वपक्षीय नहीं है।

माना जा रहा है कि मालदीव के राष्ट्रपति अपने पद की शपथ लेने के कुछ दिनों बाद नई दिल्ली आएंगे और बाद में प्रधानमंत्री मोदी का माले के लिये दिवपक्षीय दौरा होगा। साढ़े चार साल के शासन काल में प्रधानमंत्री मोदी अपने प़ड़ोस में केवल मालदीव ही नहीं जा सके हैं। २०१२ में मालदीव के राष्ट्रपति मुहम्मद नशीद को सत्चाच्युत करने के बाद अब्दुल्ला यामीन राषट्रपति बने थे और उसके बाद विपक्ष को कुचलते हुए सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत की थी। इस दौरान राष्ट्रपति यामीन ने न केवल चीन से रिश्ते गहरे करने शुरु किये बल्कि भारत को चिढाने वाले कई कदम उठाए।

अब्दुल्ला यामीन के शासन काल में भारत के साथ रक्षा सम्बन्धों पर भी गहरी आंच आयी लेकिन अब उम्मीद की जा रही है कि भारत और मालदीव के परम्परागत रक्षा सम्बन्ध फिर पटरी पर आ जाएंगे।

प्रधानमंत्री मोदी के एक दिवसीय मालदीव दौरे का ऐलान करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने यह न्योता खुशी के साथ स्वीकार किया है। प्रवक्ता ने कहा कि हमारी पडोसी प्रथम नीति के अनुरुप भारत मालदीव के साथ अपने रिश्ते गहरे करने के लिये मालदीव के साथ निकटता से काम करने की उम्मीद कर रहा है।

करीब चार लाख आबादी वाला मालदीव केरल के समुद्र तट से तीन सौ किलोमीटर दूर है और इसलिये भारत के लिये मालदीव की विशेष अङमियत है। लेकिन भारत के पड़ोस मे चीन ने सेंध लगाते हुए भारत को मालदीव से बेदखल करने की रणनीति लागू की । पर मालदीव की जनतांत्रिक ताकतों ने चीन की इस चाल को परास्त कर दिया और एक बार फिर एक ऐसे राजनेता को सत्ता सौंपी है जिनसे भारत के रचनात्मक औऱ सौहार्द्पूर्ण सम्बन्ध बहाल हो सकते हैं।

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