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स्पेशल रिपोर्टः काठमांडू तक रेल- क्या चीनी लाइन से पहले पूरी होगी ?

पीएम मोदी और नेपाल पीएम ओली

नई  दिल्ली। चीन और नेपाल के बीच गहराते सामरिक रिश्तों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 11 और 12 मई को नेपाल का तीसरा अहम दौरा होगा। पिछले महीने ही नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भारत का दौरा किया था और इसके एक महीने के भीतर ही प्रधानमंत्री मोदी का नेपाल जाने का फैसला करना इस बात का सूचक है कि भारत अपने पड़ोसी नेपाल के साथ रिश्तों को कितनी अहमियत देता है।





इंजीनियरी का चमत्कार साबित होगी रक्सौल- काठमांडू रेल लाइन

प्रधानमंत्री ओली के पिछले भारत दौरे में रिश्तों का पासा पलटने वाला रक्सौल-काठमांडू रेल लाइन बनाने का जो अहम फैसला लिया गया था उस पर काम शुरू करने की हरी झंडी प्रधानमंत्री मोदी के नेपाल दौरे में दी जाएगी। इस बारे में एक सहमति के ज्ञापन पर हस्ताक्षर काठमांडू में मोदी– ओली वार्ता के बाद सम्पन्न होंगे। रक्सौल– काठमांडू के बीच ऊंची-नीची पहाडियों के बीच रेल लाइन बनाना इंजीनियरी का  बड़ा चमत्कार साबित होगा लेकिन भारत इसे जल्द से जल्द लागू करने को कटिबद्ध है। इस रेल लाइन के पहले चरण में सर्वेक्षण कार्य सम्पन्न कर प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जाएगी जिस पर काम इस साल के अंत या अगले साल की पहली तिमाही तक पूरा होने की उम्मीद है। इस महत्वाकांक्षी रेल लाइन को बनाने में क्या क्या चुनौतियां पेश होंगी और यह रेल लाइन किस रास्ते काठमांडु पहुंचेगी इसका विस्तृत अध्ययन भारत औऱ नेपाल की साझा टीमें करेंगी। इसमें इस बात का आकलन भी किया जा सकेगा कि पूरे प्रोजेक्ट पर कितना खर्च होगा और कब तक इस रेल लाइन को पूरा किया जा सकेगा।

इस प्रोजेक्ट की अहमियत चीन की प्रस्तावित ल्हासा- काठमांडू रेल लाइन से जुड़ी है जिसे चीन ने 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। उल्लेखनीय है कि चीन ने भी भारत- नेपाल औऱ चीन के बीच त्रिपक्षीय रेल लाइन बिछाने का प्रस्ताव रखा था जिसे भारत ने नजरअंदाज किया है। प्रधानमंत्री मोदी के वूहान(चीन) दौरे में चीनी पक्ष ने भी इस मसले को नहीं छेड़ा।

चीन ने ल्हासा-काठमांडू रेल लाइन का सर्वेक्षण कार्य किया पूरा

सवाल यह उठता है कि क्या रक्सौल– काठमांडू रेल लाइन ल्हासा-काठमांडू रेल लाइन से पहले पूरी हो पाएगी। हालांकि विशेषज्ञों को इसे लेकर संदेह है। चीन ने तो ल्हासा-काठमांडू रेल लाइन का सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया है। नेपाल सरकार ने इस रेल लाइन को लेकर उत्सुकता दिखाई है। ल्हासा- काठमांडू रेल लाइन पहले पूरी हो गई तो चीन औऱ नेपाल के बीच न केवल पर्यटन औऱ आवाजाही काफी बढ़ेगी बल्कि चीनी व्यापारिक माल भी नेपाल में सस्ते में और भारी मात्रा में पहुंचाना मुमकिन हो सकेगा। तब नेपाल पर चीनी माल पूरी तरह छा सकता है। खतरा इस बात का भी रहेगा कि चीनी माल नेपाल के रास्ते भारत में भारी तादाद में पहुंचने लगेंगे।

नेपाल और भारत के बीच रेल सम्पर्क बनाने का प्रस्ताव पिछले कई सालों से विचाराधीन है लेकिन पहली बार काठमांडू तक सीधे रेल लाइन बिछाने का प्रस्ताव अमल में लाने को भारत प्रतिबद्ध दिख रहा है। नेपाल और भारत के बीच जिन दो और रेल लाइनों पर काम चल रहा है उनमें जयनगर-कुर्था और जोगबनी- विराटनगर शामिल है।

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