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स्पेशल रिपोर्ट: पाक ने सद्भावना की उम्मीदों पर पानी फेरा

करतारपुर साहिब गुरुद्वारा

नई दिल्ली। पंजाब से लगी सीमा से होकर करतारपुर साहिब गुरुद्वारा जाने के लिये भारत द्वारा  मार्ग बनाने के फैसला लिये जाने से दोनों देशों के बीच सद्भावना का माहौल बनने की जो उम्मीदें भारत औऱ पाकिस्तान में दिखने लगी थीं पाकिस्तान सरकार ने उस पर पानी फेरने का काम किया है।





 गुरुनानक देव की 550  वीं सालगिरह पर पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारों का दौरा करने गए सिख तीर्थयात्रियों से मिलने गए भारतीय राजनयिकों को अंतिम वक्त पर मंजूरी नहीं दी गई और भारतीय राजनियक गुरुद्वारों से लौट गए।  भारतीय राजनयिकों के साथ हुए इस दुर्व्यहार की भारतीय विदेश मंत्रालय ने तीव्र निंदा की है और कहा है कि  सिख यात्रियों की मौजूदगी में भारत विरोधी और दुश्मनागत वाले प्रचार किये गए हैं।

गुरुद्वारा ननकाना साहिब औऱ गुरुद्वारा सच्चा सौदा में पहुंचे भारतीय सिख यात्रियों की कुशल क्षेम पूछने भारतीय राजनयिकों से दुर्व्यवहार के बारे में भारत ने कहा है कि यह लगातार तीसरी बार हुआ है जब भारतीय राजनयिकों को सिख तीर्थयात्रियों से नहीं मिलने दिेया गया ।  इन्हें अपना राजनयिक कर्तव्य नहीं निभाने दिया गया और वे  इस्लामाबाद लौट गए।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बारे में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय से अपनी गहरी चिंता जाहिर की है और पाकिस्तान के इस रवैये पर अपना विरोध जाहिर किया है।  भारत ने कहा है कि यह  राजनियक समबन्धों पर 1961  की वियना संधि के प्रावधानों का हनन करता है।  पाकिस्तान का यह कदम भारत औऱ पाकिस्तान के बीच 1974  में हुए समझौतों का भी उल्लंघन है जिसके तहत  एक दूसरे के राजनयिक अधिकारी के साथ बर्ताव की आचार संहिता तय की गई थी।

भारत ने कहा है कि पाकिस्तान गए भारतीय सिख तीर्थयात्रियों के समक्ष साम्प्रदायिक भावनाएं भ़़ड़काने की कोशिश की गई  और अलगाववादी  प्रवृतियों को उकसाने की कोशिश की गई। यह 1971 के  भारत पाक समझौते और 1999  की लाहौर घोषणा का भी उल्लंघन है।

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