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स्पेशल रिपोर्ट: बिम्सटेक में भाग लेने मोदी नेपाल जाएंगे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

नई दिल्ली। भारत के सात पड़ोसी देशों के संगठन बिम्सटेक की चौथी शिखर बैठक काठमांडू में 30 और 31 अगस्त को होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस शिखर बैठक में भाग लेने के लिये 29 अगस्त को काठमांडू जाएंगे जहां उनकी नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली के साथ अलग से आपसी रिश्तों पर दिवपक्षीय बैठक भी होगी।





दक्षिण एशिया के आठ सदस्य देशों के दूसरे संगठन सार्क की नवम्बर, 2016  से स्थगित पड़ी 19वीं शिखर बैठक की वजह से सार्क निष्क्रिय हो चुका है जिसकी वजह से बिम्सेटक की अहमियत बढ़ गई है। बिम्सेटक( BIMSTEC)  के सदस्य देश हैं- बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, थाईलैंड और श्रीलंका। बिम्सटेक का मतलब है- बे आफ बंगाल इनीशियेटिव फौर मल्टी सेक्टोरल टेकनिकल एंड इकोनामिक कोआपरेशन ।

जब कि 1985 में स्थापित  सार्क(SAARC)  के सदस्य देश हैं- भारत, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका,  बांग्लादेश, अफगानिस्तान और श्रीलंका। सार्क का मतलब है- साउथ एशियन  एसोसिएसन फार रीजनल कोआपरेशन।

बिम्सटेक की स्थापना 1997 में हुई थी और तब कहा गया था कि सार्क के समानांतर इस दूसरे क्षेत्रीय संगठन की स्थापना इसलिये की गई है कि सार्क अपेक्षा के अनुरूप काम नहीं कर रहा। लेकिन बिम्सटेक को भी अपेक्षित तरीके से सक्रिय करने में सफलता नहीं मिली है। तब से अब तक बिम्सटेक के तीन शिखर सम्मेलन ही हुए हैं। जब कि सार्क इसलिये निष्क्रिय हो चुका है कि पाकिस्तान अपने दो पड़ोसी देशों भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ अपनी धरती से आतंकवादी हरकतें रोकने में गम्भीर नहीं दिख रहा। इस्लामाबाद में 2016 में पाकिस्तान की मेजबानी में घोषित सार्क शिखऱ बैठक पाकिस्तान द्वारा संचालित आतंकवादी हरकतों की वजह से नहीं हो सकी क्योंकि भारत ने इसमें भाग लेने से मना कर दिया तो अन्य सदस्य देशों के नेताओं ने भी इस्लामाबाद शिखर बैठक में जाने से मना कर दिया।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि बिम्सटेक के सदस्य देश आपसी आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को गहरा करने के लिये जरूरी कदम उठा सकेंगे? बिम्सटेक के सदस्य देशों के बीच भौतिक और डिजिटल कनेक्टीविटी की समस्या अभी भी बनी हुई है। यदि बिम्सटेक के सदस्य देश आपसी व्यापारिक बाधाओं को दूर करें तो इनके बाजार पर चीन का प्रभुत्व खत्म हो सकता है। बिम्सटेक के सदस्य देशों के बीच सहयोग से भारत को फायदा तो होगा ही सदस्य देशों को भी फायदा होगा क्योंकि भारत छोटे विकासशील देशों के व्यापारिक दोहन नहीं बल्कि उनके क्षमता विकास में विश्वास करता है।

भारत का कहना है कि आतंकवाद से मुक्त माहौल में ही क्षेत्रीय सहयोग मुमकिन हो सकता है इसलिये जब तक पाकिस्तान अपनी आतंकवाद समर्थक नीति का त्याग नहीं करेगा तब तक सार्क के ऐसे सदस्य देश को साथ लेकर आपसी सहयोग का माहौल नहीं बन सकता। बिम्सटेक के सदस्य देश आतंकवाद से मुक्त माहौल में काठमांडू शिखर बैठक के दौरान आर्थिक और व्यापारिक सहयोग का एक नया खाका पेश करने की उम्मीद कर रहे हैं।

 

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