DEFENCE

स्पेशल रिपोर्टः भारत-रूस रक्षा रिश्तों में कोई अड़ंगा नहीं डाल सकता

इंडिया-रूस का झंडा

भारत और रूस के रक्षा रिश्तों पर आंच पड़ने की आशंका के मद्देनजर एक सरकारी सूत्र ने कहा कि हम अपनी रक्षा जरूरतों को अपने हिसाब से ही तय करेंगे।

नई दिल्ली। रूस भारत का पुराना दोस्त और भरोसेमंद साझेदार है। 21 मई को रूस के सोची शहर में राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हो रही अनौपचारिक शिखर बैठक के पहले भारत ने जोर दे कर कहा है कि रूस भारत का मजबूत रक्षा सहयोगी है। रूस के साथ रक्षा सम्बन्धों पर  हम किसी और देश को आंच नहीं डालने देंगे।





अमेरिकी प्रतिबंध कानून कैटसा की वजह से भारत और रूस के रक्षा रिश्तों पर आंच पड़ने की आशंका के मद्देनजर यहां एक सरकारी सूत्र ने कहा कि हम अपनी रक्षा जरूरतों को अपने हिसाब से ही तय करेंगे। गौरतलब है कि अमेरिकी कांग्रेस ने एक कानून पारित किया है जिसकी वजह से रूस की कुछ चुनिंदा कम्पनियों के साथ लेनदेन करने वाले किसी भी दूसरे देश की संस्था पर अमेरिका प्रतिबंध लगा देगा।  इस बात की सम्भावना जाहिर की जा रही है कि कैटसा कानून की वजह से भारत और रूस के बीच कई रक्षा सौदों को टाला जा रहा है।

यहां विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के साथ अनौपचारिक शिखर बैठक के लिये प्रधानमंत्री 21 मई को सुबह रूस के सोची शहर पहुंचेंगे और रात को स्वदेश लौट जाएंगे। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच चार से छह घंटे तक अकेले में बातचीत होने की सम्भावना है। इसके अलावा दोनों देशों के नेता आला अधिकारियों के साथ भी बैठक करेंगे।

इस बातचीत के बारे में सूत्र ने कहा कि शिखर बैठक का कोई विचारणीय विषय नहीं तय किया गया है। दोनों नेता मुख्य तौर पर मौजूदा विश्व माहौल के अलावा क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय मसलों पर चर्चा करेंगे। इस चर्चा में अफगानिस्तान-पाक के मसले और आतंकवाद भी शामिल होगा।

जहां तक द्विवपक्षीय मसलों की बात है दोनों नेता आपसी आर्थिक रिश्तों के साथ परमाणु ऊर्जा में सहयोग के मसलों पर बात कर सकते हैं। इस अनौपचारिक शिखर बैठक के उद्देश्यों के बारे में पूछे जाने पर सूत्र ने कहा कि हम नेतृत्व स्तर पर आपसी सम्पर्कों को मजबूत करना चाहते हैं। हम यह भी देख रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय जगत में अपनी जगह कैसे बनाएं।

उल्लेखनीय है कि भारतीय सेनाएं रूसी मूल के रक्षा साज सामान पर 70 प्रतिशत से अधिक निर्भर हैं इसलिये रूस के साथ रक्षा सम्बन्ध भारत के लिये काफी अहमियत रखते हैं। रूस भारत के बड़े रक्षा साझेदारों में से है लेकिन अमेरिकी प्रतिबंध कानून कैटसा की वजह से यह रिश्ता चलाने में बाधा पैदा हो सकती है। आने वाले दिनों में भारत रूस से एंटी मिसाइल एस-400 हासिल करने के लिये सौदे पर बात कर रहा है। इसके अलावा रूस कई संवेदनशील सैन्य प्रणालियों की सप्लाई भारत को करता है।

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