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शहीदों के लिए दौड़ रहा यह Ultra-Marathon runner है कृष्ण भक्त

धावक समीर सिंह

Ultra-Marathon runner समीर सिंह अपने साथियों के साथ बुधवार को सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 132वीं बटालियन (माधोपुर) पहुंचे। बता दें कि समीर सिंह देश के बहादुर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने और उनके परिवारों की मदद के लिए देश भर में मैराथन दौड़ रहे हैं। उन्होंने यह दौड़ गत दिसंबर में अटारी बॉर्डर से शुरू की थी। 24 राज्यों और सात केन्द्रीय शासित राज्यों से होती हुई लगभग 15 हजार लंबी यह दौड़ अटारी बॉर्डर पर समाप्त होगी। समीर सिंह और उसके साथी लगभग 14 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं।





BSF की 132वीं बटालियन पहुंचने पर बटालियन के कमांडेंट एवीके सिंह, 170 बटालियन के कमांडेंट रामचंद्र और बटालियन के जवानों ने समीर सिंह का उत्साह के साथ स्वागत किया।

समीर सिंह कहते हैं कि शहीदों के परिवारों की मदद के लिए उन्होंने यह दौड़ गत दिसंबर में शुरू की थी। हर रोज वह 70 से 100 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। दौड़ के दौरान वह शहीदों के परिवारों की आर्थिक सहायता के लिए लोगों से अपील करते हैं। समीर जब दौड़ लगाते हैं तो उनके आगे-पीछे एक-एक गाड़ी रहती है, जिसमें उनके छोटे भाई, कोच तथा अन्य सहयोगी रहते हैं। समीर सिंह की इस दौड़ को फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार का पूरा सहयोग मिल रहा है। समीर ने इस दौड़ को रन फॉर कॉज, रन फॉर हीरोज और रन फॉर भारत के वीर नाम दिया है।

समीर सिंह की यह पहली दौड़ नहीं है लेकिन इस बार यह अनूठी है। अनूठी इस मायने में कि वह देश के लिए शहीद हुए जवानों के परिजनों की सहायता के लिए दौड़ रहे हैं।

समीर सिंह भगवान श्रीकृष्ण के भक्त हैं और अपनी दौड़ने की क्षमता का श्रेय वह भगवान को देते हैं। वह कहते हैं कि सिर्फ आस्था के बल पर ही इस तरह की दौड़ लगाई जा सकती है। मंदसौर के कान्याखेड़ा गांव में किसान परिवार में जन्मे समीर सिंह ने वर्ष 2004-05 में पहली बार मैराथन में हिस्सा लिया था और उसके बाद से दौड़ना उनके जीवन का हिस्सा बन गया। उन्हें जब दुनिया की बड़ी-बड़ी दौड़ों के बारे में पता चला तो उन्होंने तय किया कि वह कुछ अनूठा करेंगे। पिछले वर्ष उनके मन में आया कि क्यों न वह हर रोज 100 किलोमीटर दौड़ें और वह भी लगातार 100 दिन। लेकिन मन में संशय भी था कि क्या वह इतना दौड़ पाएंगे?  एक दिन सपने में भगवान श्रीकृष्ण दिखाई दिये तो आस्था दृढ़ हो गई कि अब कोई भी स्थिति उन्हें दौड़ने से नहीं रोक सकती। इसी वर्ष अप्रैल में उन्होंने दौड़ना शुरू किया और 100 दिन में अपना लक्ष्य हासिल कर लिया। समीर की प्रेरणा और ताकत भगवान श्रीकृष्ण हैं।

अपने अभियान की तैयारी के लिए समीर को मार्गदर्शन इस्कॉन मंदिर के अपने गुरु राधिका कन्हाई प्रभुजी से मिला। उन्होंने तैयारी करने के लिए वृंदावन जाने का सुझाव दिया। नवंबर 2016 में समीर वृंदावन चले गए। समीर अपने अभ्यास की शुरुआत वृंदावन से करते। वृंदावन की परिक्रमा 10 किलोमीटर की, फिर वहां से राधाकुंड तक 21 किलोमीटर और उसके बाद गोवर्धन की 24 किलोमीटर की परिक्रमा और उसके बाद वृंदावन तक वापस 21 किलोमीटर। कुल मिलाकर समीर हर रोज 75 किलोमीटर दौड़ने लगे। सप्ताह में दो-तीन बार दौड़ने का अभ्यास जल्द ही छह दिन में बदल गया। मार्च 2017 में वह मुंबई लौट आए और 100 दिन का अपना अभियान पूरा कर दिखाया।

अब समीर ने शहीदों और उनके परिजनों के लिए 15 हजार किलोमीटर लंबी दौड़ का लक्ष्य लेकर दौड़ रहे हैं। लगभग 14 हजार किलोमीटर की दूरी वह तय कर चुके हैं। उनके अभियान को समर्थन देने के लिए जगह-जगह सुरक्षा बलों के जवान भी उनके साथ दौड़ रहे हैं।

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