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रॉ के मुखिया रहे गिरीश चंद्र सक्सेना का निधन

गिरीश चंद्र सक्सेना

नई दिल्ली। रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW-रॉ) के मुखिया रहे जम्मू और कश्मीर के पूर्व राज्यपाल गिरीश चंद्र सक्सेना का कल एक संक्षिप्त बीमारी के बाद यहां निधन हो गया। लोग उन्हें प्यार से ‘गैरी’ बुलाते थे। यह जानकारी उनके परिवार ने दी। वह 90 वर्ष के थे। उनके भाई नरेश चंद्र ने बताया कि गिरीश को सांस लेने में दिक्कत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। नरेश चंद्र पूर्व कैबिनेट सचिव और अमेरिका में राजदूत, रहे हैं। गिरीश का जन्म 1928 में आगरा में हुआ था। वह अपने पीछे पत्नी और दो बेटियां छोड़ गए हैं।





गिरीश चन्द्र सक्सेना

गिरीश चन्द्र सक्सेना का पार्थिव शरीर उनके आवास पर (फोटो साभार-इन्डियन एक्सप्रेस)

गिरीश सक्सेना ने 26 मई 1990 को पहली बार जम्मू-कश्मीर के गवर्नर के रूप में कार्यभार संभाला और 13 मार्च 1993 तक इस पद पर रहे। 1998 में उन्हें फिर से गवर्नर नियुक्त किया गया। उत्तर प्रदेश कैडर के 1950 बैच के आईपीएस अधिकारी सक्सेना को जम्मू-कश्मीर का सबसे सफल राज्यपाल माना जाता है क्योंकि उन्होंने RAW के अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए राज्य पुलिस के खुफिया तंत्र को नया जन्म दिया। वह 1983 और 1986 के बीच रॉ के निदेशक थे। सेवानिवृत्ति के बाद गैरी जनवरी 1988 तक तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सलाहकार रहे।

गिरीश चंद्र सक्सेना

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहने के दौरान नई दिल्ली में एक बैठक में बूटा सिंह के साथ (फाइल फोटो)

गैरी सक्सेना को उस समय जम्मू-कश्मीर की कमान सौंपी गई जब आतंकवादी गुट हिजबुल मुजाहिदीन द्वारा मीरवाइज मौलवी फारूक की हत्या के बाद पूरी कश्मीर घाटी में उथल-पुथल मची थी। मीरवाइज के अंतिम संस्कार के दौरान भीड़ हिंसक हो गई और सुरक्षा बलों को हालात को काबू करने के लिए श्रीनगर में गोलियां चलानी पड़ी जिसमें करीब 25 लोग मारे गए।

राज्यपाल के रूप में अपने पहले कार्यकाल के बाद गैरी सक्सेना को 1998 में फिर से राज्य में लाया गया था। इस बार उन्होंने आतंकवाद का मुकाबला करने में लचर स्थानीय खुफिया तंत्र और राज्य पुलिस को सशक्त बनाने पर ध्यान केन्द्रित किया। अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान गैरी ने कहा था कि, “आतंकवाद के खिलाफ कोई भी लड़ाई स्थानीय पुलिस के बगैर नहीं लड़ी जा सकती।”

गैरी के भाई नरेश चंद्र 10 दिन पहले की एक घटना याद करते हुए बताते हैं कि जब उनके भाई को एक निजी अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) से बाहर लाया जा रहा था तब उन्होंने डाक्टर का हाथ पकड़कर कहा था, “जम्मू-कश्मीर में जो कुछ हो रहा है मेरे अन्दर उसके अलावा कोई तनाव नहीं है।” चंद्र ने बताया कि इस उम्र मं” भी वह जम्मू-कश्मीर की घटनाओं के प्रति चिंतित रहते थे।

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला और उनके पुत्र उमर अब्दुल्ला ने गैरी की मृत्यु पर शोक जताते हुए कहा कि उनके निधन से हमने एक दूरदर्शी शख्सियत खो दी। फारुक ने राज्यपाल गैरी के साथ अपने संबंधों को याद करते हुए कहा कि वह कठिन स्थितियों में बहुत शांत रहते थे और किसी भी समस्या के लिए हमेशा मानवीय दृष्टिकोण अपनाते थे। उमर ने कहा कि यह मेरे लिए दुखद खबर है। उन्होंने राजनीति के शुरुआती दिनों के दौरान हमेशा मुझे रास्ता दिखाया।

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