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अपराधियों के डेटाबेस CCTNS से नहीं जुड़ा बिहार का कोई भी थाना

नई दिल्ली। बिहार के किसी भी पुलिस थाने को अभी CCTNS (Crime and Criminal Tracking Network & Systems) से नहीं जोड़ा गया है। CCTNS अपराध और अपराधियों की पहचान के लिए अखिल भारतीय डेटाबेस है।





राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) की तरफ से ‘CCTNS-Good practices and Success Stories’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में NCRB प्रमुख ईश कुमार ने कहा कि इस समय देश के 15,655 पुलिस थानों में से 14,749 पुलिस थाने 7,931 कार्यालयों में से 6,649 CCTNS से जुड़े हुए हैं। CCTNS प्रणाली से नहीं जुड़ने वाले शेष थानों में से 894 बिहार के हैं। बिहार के थानों को छोड़कर अन्‍य सभी सीसीटीएन के माध्यम से एनडीसी को नियमित रूप से डाटा भेज रहे हैं।

ईश कुमार ने बताया कि 36 राज्‍यों और संघशासित प्रदेशों में से 35 राज्‍यों और संघशासित प्रदेशों ने अपना सिटीजन पोर्टल शुरू किया है जिसके माध्‍यम से लोग किरायेदारों,घरेलू नौकरों की पहचान, घरेलू नौकरों से संबंधित जानकारी तथा अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं। सीसीटीएन के माध्‍यम से अमेरिका के ग्‍लोबल एंट्री प्रोग्राम के आवेदकों के आपराधिक रिकॉर्ड भी एनसीआरबी, सीसीटीएन प्रणाली के जरिये जांच करता है।

केन्द्रीय गृह राज्‍य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि 1 अरब 30 करोड़ की आबादी वाले भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश में CCTNS प्रणाली और इससे जुड़ी प्रौद्योगिकी अपराधियों का पता लगाने और उनसे जुड़ी सूचनाएं तेजी से हासिल करने में मदद करेगी।

CCTNS की सराहना करते हुए गृह राज्‍य मंत्री हंसराज अहीर ने कहा कि सभी राज्‍यों/संघशासित प्रदेशों को अपराधों की रोकथाम के लिए इस प्रणाली का प्रभावी इस्‍तेमाल करना चाहिए। इसके जरिए राज्‍यों/संघशासित प्रदेशों को पुलिस, अदालतों, जेलों, अभियोजकों फारेंसिक प्रयोगशालाओं और किशोर सुधार गृहों के साथ बेहतर सामंजस्‍य स्‍थापित करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि गृह मंत्रालय हमेशा से ही देश में पुलिस बलों को आधुनिक बनाने का प्रयास करता रहा है। इसके लिए पर्याप्‍त वित्‍तीय मदद भी दी जाती है। इसके तहत ही CCTNS के दूसरे चरण को विकसित करने की भी मंजूरी दी गई है।

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