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नहीं रहे भगत सिंह को दिल्ली में पनाह देने वाले ‘नसीम मिर्ज़ा चंगेज़ी’

नई दिल्ली। शहीद-ए-आज़म भगत सिंह को दिल्ली प्रवास के दौरान आश्रय देने वाले नसीम मिर्ज़ा चंगेज़ी का गुरूवार को इन्तेकाल हो गया। वह 108 वर्ष के थे। उन्होंने पुरानी दिल्ली के पहाड़ी इमली स्थित अपने मकान में अंतिम सांस ली। वह काफी दिनों से बीमार चल रहे थे।





इनके कहने पर भगत सिंह को दी थी पनाह 

1910 में जन्में नसीम मिर्ज़ा ने उस जमाने के मशहूर बैरिस्टर आसिफ अली के कहने पर भगत सिंह को पनाह दी थी। एक दैनिक अखबार की खबर के मुताबिक नसीम मिर्ज़ा ने बताया था कि वर्ष 1929 में बैरिस्टर आसिफ अली ने एक युवक को इस पैगाम के साथ भेजा था कि वह आपके पास रहेगा। वह युवक थे भगत सिंह। भगत सिंह ब्राह्मण के वेश में आए थे और हमने दूसरी गली में रहने वाले अपने मित्र दयाराम के यहां भोजन की व्यवस्था कराई थी।

उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया था कि भगत सिंह उस समय असेम्बली में बम फोड़ने आए थे। यह काम भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त को सौंपा गया था। तब भगत सिंह सुबह का नाश्ता कर असेम्बली का मुआयना करने निकल जाते थे कि कहां और किस तरह से बम फेंकना है। एक दिन भगत सिंह ने उनसे कहा था कि उन्हें रास्ता मिल गया है। वह सिर्फ धमाका करेंगे और किसी की जान लेना उनका मकसद नहीं है।

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