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आपसी मोहब्बत और भाईचारा ही जीवन का आधारः गीतकार संतोष आनंद

नई दिल्ली। आपसी मोहब्बत और भाईचारा ही जीवन का आधार है। यह कहना है राष्ट्रभक्ति के गानों के लिए मशहूर गीतकार संतोष आनंद का। उन्होंने ‘पूरब और पश्चिम’, ‘शोर’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ तथा ‘क्रांति’ सरीखी फिल्मों के गीत लिखे हैं।





कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने दिव्यांगों को सही अवसर और सही मंच उपलब्ध कराने पर बल देते हुए कहा कि उनमें (दिव्यांगों) भी अपार प्रतिभा है। मनोवृत्ति वेल्फेयर फाउंडेशन के संकल्प की प्रशंसा करता हूं कि वह मानसिक रूप से कमजोर लोगों को मंच उपलब्ध कराने का काम कर रहा है।

श्रोताओं से मुखातिब होते हुए गीतकार संतोष आनंद ने कहा कि जिंदगी में तीन बार मेरा पैर टूटा, कई दिक्कतें आईं, परेशानियों ने डिगाने की कोशिश की। पर मेरे भीतर के स्वामी विवेकानंद ने मुझे कभी डिगने नहीं दिया, गिरने नहीं दिया। स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा से ही आज मैं पूरी दुनिया में विख्यात हूं। इस अवसर पर वरिष्ठ गीतकार संतोष आनंद ने शोर फिल्म का गीत-

एक प्यार का नगमा है, मौजों की रवानी है

जिंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है.. भी अपने अंदाज में सुनाया।

कार्यक्रम का आयोजन इंडिया इस्लामिक कल्चर सेंटर में स्वामी विवेकानंद जयंती पर मनोवृत्ति वेल्फेयर फाउंडेशन (Manovriti Welfare Foundation) संस्था की तरफ से आयोजित किया गया था। इस मौके पर फाउंडेशन की नंदिका चौबे ने मानसिक रोगियों के बेहतर इलाज की व्यस्था पर बल देते हुए कहा कि विदेशों में प्रत्येक शहर में मानसिक रोगियों के इलाज की व्यवस्था है लेकिन भारत में पांच लाख व्यक्तियों पर मात्र एक साइकेट्रिस्ट है। उन्होंने बताया कि आज भी लोग इलाज की बजाए झाड़-फूंक पर अधिक निर्भर रहते हैं। संस्था मानसिक रोगियों का इलाज और उनके परिजनों को जागरुक करने का काम कर रही है।

स्वामी विवेकानंद की जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम में कवि सम्मेलन का संचालन राजेश चेतन ने किया। प्रतिभा जाजू ने कहा कि कविता समाज को दिशा और दशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता मनोवृत्ति के संस्थापक अध्यक्ष भूपेन्द्र चौबे और उनकी पत्नी रचना चौबे ने की। मुख्य अतिथि श्याम जाजू थीं।

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