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जीसैट- 29 सफतापूर्वक लॉन्च, 2020 तक गगनयान के तहत प्रथम मानव रहित मिशन शुरू होगा

GSET-29

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से संचार उपग्रह जीसैट- 29 का सफल प्रक्षेपण किया। इस प्रक्षेपण को महत्वाकांक्षी ‘चंद्रयान- 2’ अभियान और देश के मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है। जी-सैट- 29 का वजन 3,423 किलोग्राम है, जिसे बुधवार शाम 5:08 बजे सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह श्रीहरिकोटा से लॉन्च हुआ 67वां और भारत का 33वां संचार उपग्रह है।





यह उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे जाने वाला भारत का सबसे भारी उपग्रह है। इसके जरिए देश के दूर्गम और दूर-दराज के इलाकों में लोगों की संचार जरूरतों के पूरा होने की उम्मीद है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) प्रमुख के. सिवन ने बताया कि चंद्रयान के साथ रॉकेट का प्रथम ऑपरेशनल मिशन जनवरी 2019 में होने जा रहा है। सबसे अहम बात यह है कि यह यान अब से ठीक तीन वर्षों के भीतर मानव को अंतरिक्ष में ले जाने वाला है।

इसरो प्रमुख सिवन के अनुसार इसरो ने अंतरिक्ष में देश के महत्वाकांक्षी मानवयुक्त मिशन को 2021 तक हासिल करने का लक्ष्य रखा है। बता दें कि प्रथम मानव रहित कार्यक्रम ‘गगनयान’ की योजना दिसंबर 2020 के लिए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के मौके पर यह घोषणा की थी कि भारत ‘गगनयान’ के माध्यम से 2022 तक एक अंतरिक्ष यात्री को भेजने का प्रयास करेगा। इस अभियान के कामयाब होने पर भारत इस उपलब्धि को हासिल करने वाला चौथा राष्ट्र बन जाएगा।

ISRO के चेयरमैन के सिवान के मुताबिक जीसैट- 29 सैटेलाइट उच्च क्षमता वाले कू-बैंड के ट्रांसपोंडरों से लैस है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इससे जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्वी भारत के दूर-दराज के क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंचाने में काफी मदद मिलेगी। यह सैटेलाइट यूनिक किस्म के ‘हाई रेज्यूलेशन’ कैमरे से लैस है, जिसे ‘जियो आई’ नाम दिया गया है। इससे हिंद महासागर में दुश्मनों के जहाजों पर नजर रखने में सहयोग मिलेगा।

जियो सिन्क्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क- 3 (GSLV MK- III) का वजन 641 टन है, जो पूरे तरह भरे हुए 05 यात्री विमानों की वजन के बराबर है। 43 मीटर की ऊंचाई वाला यह रॉकेट 13 मंजिल की बील्डिंग से ज्यादा ऊंचा है। सबसे खास बात यह है कि जीसैट- 29 भारत के सभी ऑपरेशन लॉन्च व्हीकलों में सबसे भारी-भरकम होने के बावजूद आकार में सबसे छोटा है।

 

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