Listicles

लता मंगेशकर के फौजी भैया, जिन्होंने रचीं अमर धुनें, 10 खास बातें

मदन मोहन का नाम लेते ही जेहन में कोई छवि नहीं कौंधती, कौंधती हैं तो वे धुनें जिन्हें इस शख्स ने संजोया था। हिन्दी फिल्म संगीत में गजल और मदन मोहन एक-दूसरे के पर्याय बन गए थे। सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की निगाह में वह गजलों के बादशाह थे। लता मंगेशकर उन्हें भाई मानती थीं। प्रसिद्ध संगतीकार नौशाद ने तो ‘आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे…’ और ‘है इसी में प्यार की आबरू वो जफा करें मैं वफा करूं…’ इन धुनों के बदले में अपना सारा काम समर्पित करने की बात कही थी। सिर्फ यही दो क्यों, मदन मोहन ने सैंकड़ों ऐसी अमर धुनों की रचना की। लता मंगेशकर के पसंदीदा गीत ‘लग जा गले के फिर ये हंसी रात हो न हो…’ की धुन भी उन्होंने ही बनाई थी। मदन मोहन के संगीत के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन यह बात कम ही लोग जानते हैं कि वे सेना में भी रहे थे लेकिन संगीत के जुनून ने उन्हें फिल्मों में खींच लिया। आज हम आपको मदन मोहन के बारे में बता रहे हैं चंद बातें-





इराक में जन्मे थे मदन मोहन

मदन मोहन

मदन मोहन का जन्म इराक के एक शहर में 25 जून 1924 को हुआ था। उनके पिता राय बहादुर चुन्नीलाल वहां एकाउंटेंट जनरल के रूप में कार्यरत थे। वर्ष 1932 में उनका परिवार भारत लौट आया। परिवार को चकवाल (पंजाब) में अपने पिता की देखरेख में छोड़ राय बहादुर चुन्नीलाल बिजनेस के मौकों की तलाश में बंबई (मुंबई) चले गये। मदन मोहन की शुरुआती शिक्षा लाहौर में हुई। बंबई और देहरादून में भी उन्होंने पढ़ाई की।

Comments

Most Popular

To Top