Kargil Diary

#Kargildiary : शहीद मनोहर का ख़त- मैं ठीक हूँ

करगिल शहीद





प्रिय मित्र कुलवंत,

मेरी पोस्टिंग अब आपरेशन विजय के तहत करगिल में हो गई है। मैं यहाँ बिलकुल ठीक हूँ पर करगिल में मेरी पोस्टिंग की बाबत मम्मी डैडी को न बताना। वो खामखां चिंता करेंगे। तुम मुझे पत्र लिखते रहना।

यह उस आखिरी पत्र का शुरुआती हिस्सा है जो 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स के राइफ़लमैन मनोहर लाल ने अपने मित्र को लिखा था। शायद उसको नहीं पता था कि मम्मी डैडी को अब उसकी पोस्टिंग की कभी चिंता नहीं होगी। पत्र पहुँचने से पहले मनोहर लाल शहीद होकर घर आया था।

करगिल शहीद

शहीद राइफ़लमैन मनोहर लाल के माता-पिता

25 वर्षीय मनोहर पंजाब की सीमा से सटे हिमाचल प्रदेश के ऊना जिलान्तर्गत कुठार (बीत) गाँव का रहने वाला था। वह जिस प्लाटून में था वह प्लाटून तोलोलिंग पहाड़ी पर कब्जा वापस लेने के बाद पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ती जा रही थी। प्लाटून को मश्कोह घाटी पार करनी थी। प्लाटून के सैनिक बड़े जोश में थे। कड़कड़ाती ठण्ड भी उन्हें लक्ष्य तक पहुँचने से नहीं रोक पा रही थी। देश के लिए कुछ कर मिटने के जज्बे की गरमी ने उस ठण्ड को पिघला दिया था। पर तभी बढ़ते वो कदम रुक गए। दुश्मन द्वारा बरसाए गए मोर्टार गोले प्लाटून पर गिरे। कई जवान लहूलुहान हुए उनमें से कईयों ने वहीं प्राण त्याग दिए। शहीद होने वाले उन सैनिकों में मनोहर लाल भी था।

  • मनोहर का परिवार भी हिमाचल प्रदेश के उन परिवारों में से है जिन्होंने फ़ौज को अपनी जिन्दगी का हिस्सा बना लिया है। मनोहर लाल का बड़ा भाई भी सेना में है। वो त्रिपुरा में तैनात है। मनोहर लाल के चाचा के तीन बेटे हैं और तीनों फौजी हैं।

शायद उसी का प्रभाव मनोहर पर बचपन से रहा। 1993 में वह पुलिस में भर्ती हो गया था पर उसके बाद अचानक घोषणा की गई कि उन्हीं उम्मीदवारों को पुलिस में रखा जाएगा जिन उम्मीदवारों ने बारहवीं उत्तीर्ण कर ली हो। परन्तु मनोहर दसवीं ही पास कर सका था। कुलवंत बताता है, उस दिन वह बड़ा मायूस होकर घर गया था लेकिन इस बार तो शहीद… ।

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