Kargil Diary

#Kargildiary : मुझे कुछ नहीं हो सकता, मेरी चिंता मत किया करो

लांसनायक मुकेश कुमार





कश्मीर घाटी के तंगमार्ग क्षेत्रों में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से एक जवान शहीद हो गया। होशियारपुर जिले के निवासी उस जवान का शव लांस नायक मुकेश कुमार लाया था। अपने साथी का शव जब उसके परिवार वालों ले सुपुर्द किया तब शायद मुकेश ने पहली बार मौत के दर्द का अहसास किया था। शहीद साथी के परिजनों की हालत देखकर फौजी मुकेश का दिल दहल गया था।

2 अप्रैल की उस घटना को याद करते हुए मुकेश के पिता मंगतराम कहते हैं, ‘मैंने मुकेश को पहली बार इतना मुरझाया हुआ देखा था पर जब हमने उस बारे में कुछ बात करनी चाही तो मुकेश बोला, ‘ मेरी चिंता मत किया करो।’ श्रीनगर पहुँचने के बाद उसने अपने पत्र में फिर वही बात लिखी थी, ‘मुझे कुछ नहीं हो सकता।‘ 6 फुट 2 इंच लंबा और हट्टे कट्टे जिस्म का मालिक मुकेश जिस जोश के साथ बास्केट बॉल खेलता था, उसी जोश को मैदान-ए-जंग में बरकरार रखा। गुरदासपुर जिले के धारीवाल क्षेत्र के मुकेश ने तीन साल पहले अंजुबाला से विवाह किया था। पर विगत 26 जून को उसने शहादत को अपनी दुल्हन बनाया।

  • 6 फुट 2 इंच लंबा और हट्टे कट्टे जिस्म का मालिक मुकेश जिस जोश के साथ बास्केट बॉल खेलता था, उसी जोश को मैदान-ए-जंग में बरकरार रखा।
लांसनायक मुकेश कुमार

मुकेश कुमार का नन्हा बेटा पिता की तस्वीर को निहारता हुआ।

उस शाम 188 लाइट रेजिमेंट का यह लांस नायक उन करीब 70 फौजियों में शुमार था, जो द्रास सेक्टर की एक दुर्गम पहाड़ी पर चढ़ रहे थे। वे फौजी दस टोलियों में बंटे हुए थे और हरेक के पास गोले दागने वाली गन थी। दुश्मन पाकिस्तानी घुसपैठियों द्वारा लगातार की जा रही गोलाबारी उन टोलियों को आगे बढ़ने नहीं दे रही थी। भारतीय फौजी चट्टानों की आड़ में हो गए। पर काफी देर तक हालात न बदले। यह देख जोशीले मुकेश से रहा नहीं गया और दुश्मन पर गन से आग बरसाता लगातार आगे बढ़ता गया पर उस सफर पर वह ज्यादा देर नहीं चल सका। अचानक एक गोला आया और उसके चेहरे पर लगा। लांस नायक मुकेश शहीद हो गया। धारीवाल वूलन मिल्स से सेवानिवृत मंगतराम के कुनबे में मुकेश पहला फौजी था। मुकेश के फौज में भर्ती होने की खास वजह? इस प्रश्न के जवाब में मंगतराम कहते हैं, “वो बहुत साहसी था, रोमांच से भरपूर चीजें उसे आकर्षित करती थीं।” मुकेश अक्सर होशियारपुर जाया करता था। वहां उसका ननिहाल है। उसके एक मामा सीमा सुरक्षा बल में और दो थलसेना में हैं। फौजी जीवन की उनकी बातें मुकेश गौर से सुना करता था और एक दिन वह अमृतसर पहुंच गया। वहां जवानों की भर्ती हो रही थी। मुकेश भी वहां भर्ती हो गया।

लांसनायक मुकेश कुमार

मुकेश कुमार की पत्नी अंजुबाला

  • जोशीले मुकेश से रहा नहीं गया और दुश्मन पर गन से आग बरसाता लगातार आगे बढ़ता गया पर उस सफर पर वह ज्यादा देर नहीं चल सका। अचानक एक गोला आया और उसके चेहरे पर लगा।

इतना ही नहीं मुकेश अपने छोटे भाई पवन के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गया। पवन को फौज में भर्ती कराने के लिए वह उसे हैदराबाद तक ले गया। पवन इन दिनों 230 मीडियम रेजिमेंट में अंबाला में तैनात है।

मुकेश की मां सुभाष रानी दोनों बेटों के स्वभाव का जिक्र करते हुए कहती हैं कि जितना मुकेश में जोश था उतनी ही लगन पवन में है, जिन दिनों मुकेश का विवाह हुआ था तब पवन ट्रेनिंग पर था पर कई बार कहने के बावजूद पवन छुट्टी लेकर नहीं आया।

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