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‘जाट रेजीमेंट’ यानी सेना की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी रेजीमेंट, जानें 7 खास बातें  

‘जाट रेजीमेंट’ भारतीय सेना की एक पैदल सेना रेजीमेंट है। यह सेना की सबसे पुरानी और सबसे ज्यादा वीरता पुरस्कार विजेता रेजीमेंट है। रेजीमेंट ने वर्ष 1839-1947 के बीच 19 और स्वंत्रता के पश्चात आठ महावीर चक्र, आठ कीर्ति चक्र, 32 शौर्य चक्र, 39 वीर चक्र और 170 सेना पदक  सहित ढेरों शौर्य सम्मान प्राप्त किये हैं। अपने 200 से अधिक वर्षों के जीवन में, रेजीमेंट ने पहले और दूसरे विश्व युद्ध सहित भारत और विदेशों में अनेक युद्धों में भाग लिया है। आखिर सेना में क्यों खास है ‘जाट रेजीमेंट’ आइये जानते हैं।





वर्ष 1795 में हुई रेजीमेंट की शुरुआत

जाट रेजीमेंट

माना जाता है कि रेजीमेंट की शुरुआत 1795 ‘कलकत्ता नेटिव मिलट्री’ द्वारा की गई थी, जो बाद में बंगाल सेना की एक इन्फेंट्री बटालियन बन गयी। उधर भारत में सत्ता और प्रभुत्व की तलाश में जाटों के साथ संघर्ष में आए ब्रिटिशों ने नोटिस किया कि सिखों के बाद जाटों ने उन्हें सबसे ज्यादा परेशान किया। वे जाटों के सैनिक के गुणों और दम ख़म से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें बंगाल सेना  में भर्ती करना शुरू किया। 1803 में 22 वीं ‘बंगाल नेटिव इन्फैंट्री’ की पहली बटालियन का गठन किया गया। दूसरी और तीसरी बटालियन  सन 1817 और सन 1823 में बनाई गई। जनवरी सन 1922 में, भारतीय सेना की 9 वीं जाट रेजीमेंट का गठन किया गया।

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