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सुप्रीम कोर्ट से ISRO के पूर्व वैज्ञानिक बेदाग साबित, मिलेगा 50 लाख का मुआवजा

इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व वैज्ञानिक को जासूसी कांड के आरोप से बरी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन की गिरफ्तारी अनावश्यक है। इसके अलावा कोर्ट ने उन्हें 50 लाख रूपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। ये आदेश सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिया है। कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि उन्हें बेवजह गिरफ्तार किया गया और उन्हें मानसिक प्रताड़ना दी गई।





गौरतलब है कि 76 वर्षीय पूर्व वैज्ञानिक नारायणन ने केरल के पूर्व डीजीपी सिबी मैथ्यू और दो अवकाश प्राप्त अफसरों के खिलाफ उन्हें बिना किसी कारण गिरफ्तार करने को लेकर कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि संदेह के वजह से उन्हें गिरफ्तार किया गया, जिसकी वजह से उनका करियर खराब हो गया।

इसरो जासूसी कांड का मामला सन् 1994 का है। उस समय इसरो क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन पर काम कर रहा था और वह उसे बनाने के बिल्कुल नजदीक था। तभी उसकी तकनीक लीक होने की चर्चा उड़ गई। इसके बाद केरल पुलिस ने एसआईटी जांच शुरू करवा थी। जांच के दौरान क्रायोजेनिक इंजन विभाग के प्रमुख नंबी नारायणन गिरफ्तार कर लिए गए और अनुसंधान का काम रुक गया।

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