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सेना के तीन अफसरों समेत 7 को उम्र कैद, मामला था फर्जी मुठभेड़ का

सर्जिकल स्ट्राइक

नई दिल्ली। असम में एक फर्जी मुठभेड़ मामले में आर्मी कोर्ट ने सेना के तीन अधिकारियों और 4 सैन्यकर्मियों को उम्र कैद की सजा सुनाई है। मीडिया खबरों के मुताबिक जिन अधिकारियों और सैन्यकर्मियों को सजा सुनाई गई है उनमें एक पूर्व मेजर जनरल, 2 कर्नल और 4 सैनिक हैं। यह ऐतिहासिक फैसला असम के डिब्रूगढ़ जिले के डिंजन स्थित 2 इन्फैंट्री माउंटेन डिविजन में हुए कोर्ट मार्शल में सुनाया गया। मामला 24 वर्ष पुराना 1994 का है जब असम में 5 युवकों को सैनिकों ने मुठभेड़ में मार गिराया था। सैन्य अदालत ने इस मुठभेड़ को फर्जी करार दिया। मीडिया खबरों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है उच्च स्तर जैसे कोलकाता स्थित ईस्टर्न आर्मी कमांड और नई दिल्ली स्थित आर्मी हेडक्वार्टर्स से इसकी पुष्टि होना बाकी और इसकी आधिकारिक पुष्टि होने में 2-3 महीने लग सकते हैं।





खबरों में सूत्रों के हवाले से जिन सैन्यकर्मियों को दोषी ठहराया गया है उनमें पूर्व मेजर जनरल ए.के. लाल, कर्नल थामस मैथ्यू, कर्नल आर.एस. सिबिरेन, कैप्टन दिलीप सिंह, कैप्टन जगदेव सिंह, नायक अलबिंदर सिंह और नायक शिवेंद्र सिंह शामिल है। दोषी सैन्यकर्मी इस फैसले के खिलाफ आर्म्ड फोर्सेज ट्राइब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

सैन्य कोर्ट का फैसला आल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) के कार्यकर्ताओं प्रबीन सोनोवाल, प्रदीप दत्ता, देबाजीत बिस्वास, अखिल सोनोवाल और भाबेन मोरन की हत्या के मामले में सामने आया है। दरअसल एक चाय बागान के जनरल मैनेजर की उल्फा उग्रवादियों ने हत्या कर दी थी। उसी मामले में सेना ने  5 युवकों को मठभेड़ में मार गिराया था।

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