Health

DRDO की इन ‘युद्धक दवाइंयों’ से शहीदों की संख्या में आएगी कमी

DRDO Medicine

नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के वैज्ञानिकों ने अपनी प्रयोगशाला में ऐसी युद्धक दवा (कॉम्बैट कैजुएलिटी ड्रग) विकसित की है जिससे सेना, सशस्त्र बलों के घायल जवानों को अस्पताल पहुंचाए जाने से पहले के बेहद नाजुक समय को बढ़ाया जा सकेगा। शोध बताते हैं कि गंभीर रूप से घायल सुरक्षाकर्मियों में से 90 प्रतिशत जवान कुछ ही घंटे में दम तोड़ देते हैं।





वैज्ञानिकों ने 24 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि इन दवाओं से मृतक संख्या में कमी लाई जा सकेगी। वैज्ञानिकों ने बताया कि इन दवाओं में खून बहने वाले घाव को भरने वाली दवा, अवशोषक ड्रेसिंग और ग्लिसरेटेड स्लाइन शामिल है। ये सभी चीजें देश के अत्याधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों, युद्ध क्षेत्रों, जंगलों और आतंकी हमलों की स्थिति में सुरक्षाकर्मियों की जान बचाने में मदद करेंगी और शहीदों की संख्या में कमी लाएंगी।

DRDO में लाइफ सांइसेस के डायरेक्टर जनरल एके सिंह ने कहा कि यह स्वदेश निर्मित दवाएं सेना और अर्धसैनिक बलों के लिए युद्ध के समय वरदान है। उन्होंने कहा कि ये दवाएं यह सुनिश्चित करेंगी कि घायल जवानों को युद्ध क्षेत्र से चिकित्सा उपचार के लिए ले जाए जाने के दौरान हमारे जांबाज सैनिकों का खून बेकार न बहे।

DRDO की प्रयोगशाला ‘इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड सांइसेस’ में दवाइयां तैयार करने वाले वैज्ञानिकों के मुताबिक घायल होने के बाद और अस्पताल पहुंचाए जाने से पहले यदि जख्मी जवान को प्रभावी प्राथमिक उपचार दिया जाए तो उसके जीवित बचने की उम्मीद ज्यादा होती है।

 

Comments

Most Popular

To Top