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पाकिस्तान में चुनाव:  सेना के साथ से इमरान आगे

इमरान खान

लॉस एंजेल्स से ललित मोहन बंसल…

क्रिकेट पिच पर 1992 में विश्व कप में खिताबी जीत के नायक इमरान खान की राजनीतिक मैदान पर चल रही पारी में सेना के समर्थन की बात यहां मीडिया में चल रही है। इमरान खान को मिलिट्री, ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई और न्याय पालिका से समर्थन मिलने की बातें कही जा रहीं हैं। अमेरिकी मीडिया का कहना है की पाकिस्तान की मिलिट्री और ख़ुफ़िया एजेंसी भ्रष्टाचार में लिप्त तंत्र को सीधे अपदस्थ कर सैनिक शासन की बजाए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) को ढाल बना कर राजपाट चलाना चाहती है। ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट पालिसी इंस्टीट्यूट’ की ओर से कराए गए एक सर्वे में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ को विजयी बताया गया है, जबकि पीएमएल-नवाज़ के ख़िलाफ़ उसकी बढ़त मात्र चार प्रतिशत ही दिखाई गई है। हालाँकि कुछेक स्वतंत्र सर्वे में पीएमएल-नवाज़ की पार्टी को नंबर एक और पीटीआई को नंबर दो पर दिखाया जा रहा है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नवाज़ शरीफ़ को भ्रष्टाचार के आरोप में दस साल की सज़ा सुना कर अदियाला जेल में ठूँस दिया गया था। इनके साथ उनकी बेटी मरियम शरीफ़ को भी जेल भेजा जा चुका है, हालाँकि नवाज़ शरीफ़ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मिलिट्री की साज़िश बताया है।





छोटी पार्टियां और निर्दलीय दे सकते हैं इमरान का साथ

इमरान की राजनैतिक पिच पर जीत के लिए तत्कालीन विश्व कप चैम्पियन टीम के खिलाड़ियों ने खुल कर समर्थन देने की घोषणा की है। पाकिस्तान नेशनल असेंबली (कुल 342, सीधे चुनाव 272 सीट) और चारों प्रांतीय असेंबली-पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तुनवा के चुनाव एक साथ बुधवार, 25 जुलाई को हो रहे हैं। इनमें पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़, पाकिस्तान पीपल्स पार्टी और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ सहित एक दर्जन से अधिक पार्टियाँ चुनाव में भाग ले रही है, लेकिन इस चुनाव में छोटी-छोटी क्षेत्रीय पार्टियों और निर्दलीयों की अहमियत अधिक है, जो स्वार्थवश राजनीति के बल पर इमरान का साथ दे सकते हैं।

इमरान की पार्टी को ढाल बनाकर शासन करेगी सेना !

अमेरिकी और पश्चिमी  देशों की मीडिया की माने तो इमरान खान को इस बार राजनैतिक पारी खिलाने की मुहिम में मिलिट्री और ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई जुटी हुई है। इस के लिए सेना अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय के भय से इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए इंसाफ़ को ढाल बना कर शासन करने का मन बना चुकी है। इसके लिए एक ओर जहाँ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ की पार्टी और इसके नेताओं को जहाँ-तहाँ भ्रष्टाचार के रंग में लपेटा जा रहा है, वहीं पाकिस्तानी मीडिया के ख़िलाफ़ अघोषित सेंसर लगा कर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल की चारदीवारी में ठूँसा जा रहा है। इस कार्य में देश की उच्च स्तर पर न्यायपालिका के हाथ होने के भी आरोप लगाए जा रहे है। इस मुहिम के पीछे देश की बिगड़ती अर्थ व्यवस्था, उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार, आतंकी गतिविधियों में बढ़ोतरी बताया जा रहा है।

अल क़ायदा की एक ब्रांच हरकत-अल-मुजाहीद्दीन का इमरान को समर्थन

इमरान खान पिछले दो दशक से राजनीति में हैं और उन्होंने इस समस्याओं पर क़ाबू पाने के लिए अमेरिका तथा चीन, दोनों ही बड़ी शक्तियों के हस्तक्षेप की समय-समय पर खुल कर आलोचना की है। अफ़ग़ानिस्तान समस्या के निदान में अमेरिकी हस्तक्षेप की निंदा की है, वहीं अफगनिस्तान और तालिबान की सीधी वार्ता के बजाए पाकिस्तान की भागीदारी पर ज़ोर दिया है। इसी तरह भारतीय सीमा पार आतंकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने अथवा अपनी सेना और पाकिस्तानी रेंजर की भूमिका पर उनके और सेना के नज़रिए में कोई बदलाव नहीं आया है। वह पूर्ववर्ती शासकों और सेना के रवैए के अनुरूप ‘अच्छे और ख़राब आतंकवाद’ के बीच फ़र्क़ नहीं कर पाने के लिए विवश हैं। सेना की सरपरस्ती में अल क़ायदा की एक ब्रांच हरकत-अल-मुजाहीद्दीन ने इमरान का समर्थन किया है, तो वहीं इस्लामाबाद स्थित मौलाना फ़ज़ल उर रहमान ख़लीली ने सैकड़ों समर्थकों के साथ इमरान को सहयोग देने का वादा किया है। अमेरिका और भारत, दोनों की निगाह में यह आतंकवादी गतिविधियों में शरीक रहा है। अमेरिकी मीडिया यह भी कहता आ रहा है कि इमरान के सैमुअल हक़ से रिश्ते बढ़ते जा रहे हैं, जिसे फ़ादर आफ तालिबान के नाम से पुकारा जा रहा है। सेना ने इस्लामिक मिलिटेंट ग्रुप तालीबान लश्कर ए झाँगवी और लश्कर ए तैयबा का सहारा लिया ताकि बलूचिस्तान की जंगे आज़ादी के दीवानों को दबाया जा सके। बाद में इन्हीं मिलिटेंट ने सेना की मदद से बलूचिस्तान में सरकारी संस्थानों को निशाना बनाया। पाकिस्तान तंत्र और सेना को यह मंज़ूर नहीं था। सेना के पास कोई विकल्प नहीं बचा तो उस ने लश्कर ए झाँगवी के कमांडर उस्मान सैफ़ुल्ला कुर्द को पिछले दिनों क्वेटा में एक भिड़ंत में मार गिराया है। असल में सेना के समर्थन से हाल में गठित बलूचिस्तान अवामी पार्टी को एक उपहार माना जा रहा है ।

 

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