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हाईकोर्ट की तल्ख़ टिप्पणी, कानून न अंधा है और न ही अदालतों ने आंखें मूंदी हैं

दिल्ली-हाईकोर्ट

अदालतो में न्याय की देवी ने आंखों पर काली पट्टी बांध रखी है इसका मतलब यह नहीं है कि कानून अंधा है और अदालतों ने अपनी आंखे मूंद रखी है। अदालत समाज में हो रहे गलत कामों पर अपनी आंखें मूंदे नहीं रहेगा और बचाव में अफसोसजनक तर्कों पर यकीन कर लेगा।

नई दिल्ली: ‘अदालतो में न्याय की देवी ने आंखों पर काली पट्टी बांध रखी है इसका मतलब यह नहीं है कि कानून अंधा है और अदालतों ने अपनी आंखे मूंद रखी हैं। अदालत समाज में हो रहे गलत कामों पर न अपनी आंखें मूंदे रहेगी और न ही बचाव में अफसोसजनक तर्कों पर यकीन कर लेगी। लोगों को गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए।’ यह टिप्पणी दिल्ली हाईकोर्ट ने संपत्ति मामले में 94 वर्षीय बूढ़ी मां को अदालत के चक्कर लगवाने वाले हरीश नामक एक शख्स को फटकार लगाते हुए कही। 





न्यायमूर्ति हिमा कोहली ने मामले में लापरवाह बेटे पर सख्ती दिखाते हुए उस पर 5.3 लाख का जुर्माना भी लगाया। न्यायमूर्ति हिमा ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ याचिकाकर्ताओं को लगता है कि कानून अंधा है लेकिन ऐसा नहीं है। ऐसे लोग सावधान रहें। कोर्ट ने कहा कि अदालतें किसी के वर्चस्व, पैसे, ताकत और सम्बन्धों से प्रभावित नहीं होती। कोर्ट निष्पक्ष फैसला करती है।

मामले पर एक नजर:

  • राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंगपुरा इलाके का हा मामला।
  • 16 साल से बेटा हरीश अपनी मां को कानूनी पचड़े में फंसाकर खुद संपत्ति पर कब्जा करके बैठा था।
  • पीड़ित मां ने लोन लेकर बनवाया था घर। 1999 से मां ने हरीश को कर दिया था घर से बेदखल।
  • 2001 में मां ने बेटे हरीश को रहने के लिए तीसरी मंजिल कुछ समय के लिए दी थी। बाद में हरीश ने घर पर जबरन कब्जा कर लिया। उसने बाद में अदालत में याचिका लगा दी।
  • हरीश ने अपने भाईयों और मां के खिलाफ हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी लेकिन हर जगह उसे मुंह की खानी पड़ी।
  • कोर्ट ने हरीश को फटकार लगाते हुए 5.3 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया।

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