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पैलेट गन के अलावा क्या रास्ते हैं, 10 अप्रैल को बताइए : सुप्रीम कोर्ट

कश्मीर में पत्थरबाजी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह जम्मू-कश्मीर में हिंसा से निपटने के लिए पैलेट गन के अलावा दूसरे विकल्पों पर विचार करें ताकि दोनों पक्षों का बचाव हो सके। मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी से कहा कि वह 10 अप्रैल को इस बारे में कोर्ट को विस्तार से बताएं।





पैलेट गन मामला

सुप्रीम कोर्ट में पैलेट गन मामले की सोमवार को सुनवाई हुई

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि पैलेट गन का जिन पर इस्तेमाल होता है क्या वे नाबालिग होते हैं तो केंद्र ने कहा कि ऐसा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि इसके बारे में आपने अब तक क्या किया है? याचिकाकर्ता ने कहा कि पैलेट गन सीधी दिशा में निशाना नहीं बनाते। ट्रिगर दबाने के बाद ये सभी दिशाओं में चले जाते हैं। ये उसे भी लग सकता है जो अपने घर के अंदर खिड़की के सामने खड़ा हो। ईशा नाम की एक लड़की पैलेट गन लगने से अंधी हो गई जबकि वो प्रदर्शन में शामिल भी नहीं थी और अपने घर की खिड़की से बाहर देख रही थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि केंद्र ने कहा था कि वे पेपर (मिर्च) गन का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने कुछ समय इसका इस्तेमाल किया और बाद में फिर पैलेट गन का इस्तेमाल करने लगे।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि वहां किस तरह के प्रदर्शन होते हैं। तो याचिकाकर्ता ने कहा कि वह किसी भी तरह का हो सकता है। अपने अधिकार के लिए भी प्रदर्शन हो सकता है। केंद्र ने कहा कि जहां रोज ब रोज दंगे होते हैं वहां आप ये कैसे तय कर सकते हैं कि ये इस्तेमाल करो, वह इस्तेमाल मत करो। ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि इससे काफी लोगों की मौत हुई।

कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने याचिका दायर कर कहा था कि घाटी में पैलेट गन का दुरुपयोग होता है। जिससे घाटी में कई जानें चली गईं। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल दिसंबर में इस याचिका को स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार को इस संबंध में गठित विशेषज्ञों की टीम की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। पिछले साल जुलाई में केंद्र सरकार ने पैलेट गन के विकल्प पर विचार करने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया था।

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