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असैन्य सहायकों के लिए आगे आया सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह जोखिम भरे क्षेत्रों में सेना के लिए काम करनेवाले सहायकों (पोर्टर) को बेहतर भुगतान, चिकित्सा सुविधा, बढ़ी हुई आर्थिक सहायता और सेवा से अलग होने की स्थिति में 50,000 रुपये की प्रस्तावित राशि से अधिक का अनुदान देने के लिए एक योजना जल्द से जल्द तैयार करे।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह जोखिम भरे क्षेत्रों में सेना के लिए काम करने वाले सहायकों (पोर्टर) को बेहतर भुगतान, चिकित्सा सुविधा, बढ़ी हुई आर्थिक सहायता और सेवा से अलग होने की स्थिति में 50,000 रुपये की प्रस्तावित राशि से अधिक का अनुदान देने के लिए एक योजना जल्द से जल्द तैयार करे।





इस तरह के सहायक राजौरी, जम्मू और पुंछ जैसे इलाकों में भारतीय सेना की मदद करते हैं। इनकी संख्या लगभग 12,000 है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि इनको स्थायी करते समय इन सहायकों के बड़े हिस्से को ध्यान में रखा जाए ताकि अधिक से अधिक लोगों को कार्यकाल के फायदे मिल सकें जिन्होंने न्यूनतम सेवा की अवधि पूरी की है।

मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने हुए प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर और जस्टिस एएम खानविलकर की पीठ ने यह निर्देश जारी किया। निर्देश में यह भी कहा कि ये सहायक समाज के बहुत गरीब तबके से आते हैं और उनके पास शायद शैक्षणिक योग्यता नहीं हो लेकिन वे सेना को महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करते हैं तथा सीमावर्ती इलाकों में अभियानों का अभिन्न हिस्सा होते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि इन सहायकों के लिए योजना को तीन महीने में अंतिम रूप दिया। साथ ही कोर्ट ने  29 सहायकों की ओर से दायर याचिकाओं का निस्तारण भी कर दिया।

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