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यूपी पुलिस के अफसरों पर हाईकोर्ट की गंभीर टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि प्रदेश पुलिस के अधिकारी कानून को ताक पर रख अपने अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ आदेश पारित कर रहे हैं।





कोर्ट ने कहा कि जब पूर्णपीठ के फैसले के आधार पर पुलिस विभाग ने सर्कुलर जारी किया है कि किसी भी पुलिस अधिकारी अथवा पुलिसकर्मी का निलंबन बिना प्रारंभिक जांच पूरी किये नहीं हो सकता, तो पुलिस विभाग के शीर्ष क्रम के अधिकारी कानून को दरकिनार कर बिना प्रारंभिक जांच पूरी किये अपने मातहत अधिकारियों को निलंबित कैसे कर रहे हैं?

जस्टिस पी.के.एस. बघेल ने जीआरपी कानपुर में तैनात पुलिस इंस्पेक्टर सतीश कुमार गौतम की याचिका पर दिए गए अपने फैसले में उक्त टिप्पणी की है। गौतम को 26 मई को आईजी रेलवे पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद ने आरोपों की प्रारंभिक जांच कराए बगैर निलंबित कर दिया।

इंस्पेक्टर गौतम पर आरोप है कि कानपुर स्टेशन पर मिली एक लड़की का पता मिल जाने के बाद भी न तो उसे उसके घरवालों को बताया और न ही उसे उसके घर के पते पर भेजा, बल्कि रात होने के कारण उस लड़की को सीधे नारी प्रगति सेवा संस्थान, काकादेव कानपुर नगर भेज दिया। पुलिस ने ऐसा कर असंवेदनशीलता का परिचय दिया।

वहीं अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि इंस्पेक्टर पर लगा आरोप गलत है और आईजी ने बिना प्रांरभिक जांच किये उसे निलंबित कर गैरकानूनी आदेश पारित किया है। कोर्ट ने आईजी रेलवे से इस मामले में उनका व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है तथा केस की अगली सुनवाई के लिए आगामी 29 जुलाई की तिथि नियत की है।

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