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अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति देने के कानून में बदलाव

कोई विधवा अपने पति की मौत के बाद यदि बच्चा गोद लेती है तो उसके दिवंगत पति को ही बच्चे का पिता माना जाएगा। ऐसे में वह बच्चा मृतक का आश्रित होने के चलते अनुकम्पा के आधार पर नौकरी पाने का हकदार भी होगा। गोद लिए गए बेटे को नौकरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।

कोई विधवा अपने पति की मौत के बाद यदि बच्चा गोद लेती है तो उसके दिवंगत पति को ही बच्चे का पिता माना जाएगा। ऐसे में वह बच्चा मृतक का आश्रित होने के चलते अनुकम्पा के आधार पर नौकरी पाने का हकदार भी होगा। गोद लिए गए बेटे को नौकरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। इससे लाखों लोगों को फायदा मिल सकेगा।





पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह अहम फैसला सुनाते हुए बीएसएफ के रिटायर जवान की विधवा के गोद लिए बेटे को दो माह के भीतर नौकरी देने का आदेश दिया है। इस मामले में पंजाब सरकार ने नौकरी देने से इनकार कर दिया था।

आतंकी समझकर सीआरपीएफ की ओर से की गई कार्रवाई में बीएसएफ के रिटायर्ड जवान और उसके नाबालिग बेटे को मार दिया गया था। 1991 में सीआरपीएफ की कार्रवाई में सुखविंदर के पति और बेटे की मौत हो गई थी। उधर, बेटे और पति दोनों की मौत के चलते सुखविंदर बेसहारा हो गई थी। ऐसे में उन्होंने इसी साल भाई के घर पैदा हुए बेटे को गोद ले लिया। तरनतारन निवासी सुखविंदर कौर के पति बीएसएफ से रिटायर हुए थे। घटना के बाद पंजाब सरकार ने अनुकम्पा के आधार पर नौकरी का वादा किया था।

दूसरी तरफ, केंद्र ने सरकारी नौकरियों में अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति देने के कानून में बदलाव किया है। किसी सरकारी कर्मचारी के असमय निधन या किसी चिकित्सकीय वजह से 55 साल से कम उम्र में रिटायर हो जाने की स्थिति में उसके एक आश्रित को उसकी जगह नौकरी देना का प्रावधान है। अभी तक अनुकम्पा के तौर पर केवल पत्नी या अविवाहित पुत्र-पुत्री को ही नौकरी मिल सकती थी। अब नए नियम के तहत विवाहित पुत्र को आश्रित के तौर पर नौकरी मिल सकती है। अनुकम्पा पर नौकरी पाने से जुड़े बाकी नियम पहले जैसे ही रहेंगे।

मंत्रालय के आदेश के अनुसार जो लोग 2013 से 2015 के बीच पुराने नियम की वजह से अनुकम्पा पर नौकरी नहीं पा सके थे उनके आवदेन पर सरकार फिर से विचार कर सकती है।

जनवरी 2013 में सरकार ने अनुकम्पा पर नौकरी पाने से जुड़े कानून में बदलाव किया था। उसके बाद मंत्रालय की वेबसाइट पर अनुकम्पा से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में कहा गया था कि विवाहित पुत्र को अनुकम्पा पर नौकरी नहीं दी जा सकती। हालांकि, मंत्रालय के जवाब में ये भी स्पष्ट किया गया था कि विवाहित पुत्री को पूरी तरह आश्रित होने की स्थिति में अनुकम्पा पर नौकरी दी जा सकती है, बशर्ते वो परिवार के अन्य सदस्यों का भी भरण-पोषण करे। सरकार ने फरवरी 2015 में अपना निर्णय बदला और कहा कि विवाहित पुत्र भी विवाहित पुत्री के लिए लागू शर्तों को पूरा करने की सूरत में अनुकम्पा पर नौकरी पा सकते हैं।

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