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हर तीसरे महीने रक्तदान करने वाले भारत के मुख्य न्यायाधीश

नई दिल्ली: भारत के प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर अपनी सख्त छवि के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कई बड़े फैसले लिए हैं जैसे कि सेबी-सहारा मामले में सुनवाई के दौरान सहारा चीफ सुब्रत रॉय सहारा को जेल भेजना, नेशनल हेरॉल्ड मामले की सुनवाई करना, अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगने के मामले में फैसला लेना। ठीक उसी तरह उन्होंने एक फैसला 40 वर्ष पहले लिया था। वह था रक्तदान करने का। जस्टिस खेहर पिछले 40 वर्ष से हर तीसरे महीने रक्तदान करते हैं।





जस्टिस खेहर के बारे में:

  • उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रह चुके हैं
  • एनजेएसी मामले में पीठ की अध्यक्षता कर चुके हैं
  • जस्टिस खेहर उस पीठ की भी अध्यक्षता कर चुके हैं, जिसने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को खारिज कर दिया था
  • जस्टिस खेहर उस पीठ के भी सदस्य थे, जिसने सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय की दो कंपनियों में लोगों द्वारा निवेश किए गए धन की वापसी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान रॉय को जेल भेज दिया था

वह नियमित कर्मचारियों जैसे कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले दिहाड़ी मजदूरों, अस्थायी एवं अनुबंध कर्मचारियों के लिए ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ के सिद्धांत की पैरोकारी करने वाला अहम फैसला सुनाने वाली पीठ के भी अध्यक्ष रहे हैं।

केंद्र को लगाई थी फटकार

हाई कोर्टों में जजों की नियुक्ति को लेकर न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच तकरार तेज होने पर 26 नवंबर को संविधान दिवस के मौके पर न्यायमूर्ति खेहर ने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी के आक्षेप पर कहा था कि न्यायपालिका अपनी ‘लक्ष्मणरेखा’ के बीच काम कर रही है।

जस्टिस खेहर ने केंद्र को फटकार लगाते हुए कहा था, ‘न्यायपालिका भेदभाव और सरकारी शक्ति के दुरूपयोग से सभी लोगों, नागरिकों और गैर-नागरिकों की समान भाव से रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। देश में न्यायपालिका की अग्र-सक्रिय भूमिका के कारण ही भारत में नागरिकों की स्वतंत्रता, समानता और सम्मान पर्याप्त रूप से समृद्ध बने हैं।’

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