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जन्मदिन विशेष : चादर न छूटती तो कभी अंग्रेजों के हाथ नहीं आते ‘राम प्रसाद बिस्मिल’, जानें 10 फैक्ट्स

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है….

ये दोहे हम हमेशा सुनते और दोहराते आए हैं लेकिन इन दोहों को लिखने वाले वीर क्रांतिकारी ने अपने देश की आजादी के लिए मात्र 30 वर्ष की आयु में ही फांसी की फंदे को चूम लिया। जी हां, रामप्रसाद बिस्मिल भारतीय स्वतंत्रता की क्रांतिधारा के प्रमुख सेनानी थे वह एक कवि, शायर, अनुवादक इतिहासकार और साहित्यकार भी थे रामप्रसाद बिस्मिल ने ही मैनपुरी षड्यंत्र तथा काकोरी कांड की रूप रेखा तैयार की थी। रामप्रसाद बिस्मिल का जन्म उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में  हुआ था।  इस महान क्रांतिकारी के जीवन से जड़ी कुछ खास बाते आज हम आपको बताने जा रहे हैं।





शहाजहांपुर में जन्में थे बिस्मिल

11 जून 1897 को उत्तर प्रदेश के शहाजहांपुर में रामप्रसाद का जन्म हुआ, 1916 में उन्होंने 19 वर्ष की आयु में क्रांतिकारी मार्ग पर अपना कदम रखा। अपने पिता मुरलीधर और माता मूलमती की दूसरी संतान थे। माता-पिता राम के आराधक थे। इसलिए उन्होंने बालक का नाम रामप्रसाद रख दिया।

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