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बीटिंग रिट्रीट: सेना के बैंड के बीच राजपथ हुआ रोशन

बीटिंग रिट्रीट कार्यक्रम के साथ चार-दिवसीय गणतंत्र दिवस समारोह संपन्न हो जाता है। इस आयोजन में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी इस बार पारंपरिक बग्घी में पहुंचे। सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों ने राष्ट्रपति का स्वागत किया।

बीटिंग रिट्रीट कार्यक्रम में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी पारंपरिक बग्घी में पहुंचे। सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के कार्यकाल में बग्घी की यह आखिरी सवारी थी। प्रणब मुखर्जी 2012 में राष्ट्रपति बने और 2014 के बीटिंग रिट्रीट कार्यक्रम में बग्घी को फिर से शामिल किया गया था। इसके पहले सुरक्षा कारणों से करीब तीन दशकों से सार्वजनिक समारोह में बग्घी का उपयोग नहीं किया जा रहा था। हालांकि 2015 में राष्ट्रपति अपनी लिमोजिन से आए थे।






विजय चौक पर कार्यक्रम

बीटिंग रिट्रीट कार्यक्रम में सेना के विभिन्न बैंड्स ने शानदार धुनें बजाईं। विजय चौक पर आयोजित कार्यक्रम में इस साल कार्यक्रम में सेना के 16 बैंड के अलावा 16 पाइप एवं ड्रम बैंड भी शामिल हुए। 26 से ज्यादा धुनें बजाई गईं। सेना के बैंड द्वारा प्रस्तुत ‘मेरा मुल्क, मेरा देश, मेरा यह वतन…’ को समारोह में मौजूद लोगों ने काफी सराहा। बेहतरीन तरीके से मार्च पास्ट के साथ पेश किए गए ‘जय भारती’ ने भी लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा।

‘सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा…’

समारोह के समापन के हिस्से में बैंड ‘सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा…’ के साथ रायसीना हिल की तरफ मार्च करते हुए गए। उनके दूर चलते चले जाने के साथ ही राष्ट्रपति भवन, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, संसद भवन परिसर और आसपास के भवन रोशनी में नहा उठते हैं।

बीटिंग रिट्रीट कार्यक्रम सेना की सदियों पुरानी परंपरा है, जब सैनिक युद्ध के बाद शाम को अपने शिविरों में लौटते थे। बीटिंग रिट्रीट के साथ ही चार दिन तक चलने वाले गणतंत्र दिवस समारोह का समापन होता है।

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