Anya Smachar

VVIP’s नहीं लगा सकेंगे वाहनों पर लाल बत्ती, सिर्फ इन्हें है छूट

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने वीवीआईपी कल्चर को समाप्त करने का फैसला लिया है। फैसले के तहत अब कोई भी वीवीआईपी, नेता, अधिकारी अपने वाहन में लाल बत्ती नहीं लगा सकेगा। यह फैसला 1 मई 2017 से लागू हो जाएगा। नीली बत्ती का इस्तेमाल भी केवल आपातकालीन सेवाओं, पुलिस के लिए ही हो सकेगा। हालांकि पुलिस अधिकारियों और रक्षा मंत्रालय एवं रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को लाल बत्ती लगाने की छूट है।





प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया। इसके तहत 1989 के मोटर वाहन एक्ट की धारा 108 में संशोधन किया गया है। नए नियम के तहत अब लालबत्ती का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया गया है जबकि, नीली बत्ती का इस्तेमाल एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस आदि ही कर सकेंगे।

मंत्रिमंडल के फैसले की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने स्पष्ट किया कि लालबत्ती का इस्तेमाल अब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी नहीं कर सकेंगे। जेटली ने बताया कि यह फैसला राज्य सरकारों पर भी लागू होगा। हालांकि, राज्यों पर इस फैसले का क्या असर होगा, इस बारे में अभी चर्चा जारी है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, केन्द्रीय राज्य मंत्री गिरिराज सिंह समेत कई मंत्रियों ने अपने वाहन से लाल बत्ती हटा दी। गडकरी अपनी सरकारी गाड़ी से इस बत्ती को हटाने वाले पहले नेता हैं। उन्होंने कहा, हमारी सरकार आम लोगों की सरकार है। इसलिए हमने लाल बत्ती और हूटर्स का वीवीआईपी कल्चर खत्म करने का फैसला किया है। गडकरी ने इसे बड़ा लोकतांत्रिक फैसला बताते हुए कहा कि जल्द ही इस विषय में अधिसूचना जारी की जाएगी।

संस्कृति व पर्यटन मंत्री महेश शर्मा व खेल मंत्री विजय गोयल ने भी कैबिनेट फैसले के तुरंत बाद अपनी-अपनी गाड़ियों से लाल बत्तियां हटवा दीं। केंद्र सरकार के मंत्रियों के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने भी केंद्रीय कैबिनेट के फैसले का स्वागत करते हुए अपनी कार से लाल बत्ती तुरंत हटवा दी। पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ लालबत्ती का इस्तेमाल पहले ही छोड़ चुके हैं।

इसलिए लिया गया फैसला

दरअसल, सितबंर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में लाल बत्ती के सीमित इस्तेमाल की पैरवी की थी। हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी थी। गडकरी ने तब से चल रही प्रक्रिया, विभिन्न मंत्रालयों के साथ हुए पत्राचार, कानूनी राय और अब तक मिले सुझावों का ब्योरा भी प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा था। जिसके बाद यह फैसला लिया गया है।

हालांकि, इसमें विकल्प दिया गया था कि संवैधानिक पदों पर बैठे 5 लोगों को ही इसके इस्तेमाल का अधिकार हो। इन पांच में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और लोकसभा स्पीकर शामिल थे, हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी को भी रियायत न देने का फैसला किया।

ये लोग करते हैं लाल बत्ती का प्रयोग

मोटर व्हीकल एक्ट के मुताबिक, देश में लाल बत्ती इस्तेमाल करने वाले प्रमुख लोगों में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा के अध्यक्ष, प्रधानमंत्री, सभी कैबिनेट मंत्री औऱ कुछ कैबिनेट सचिव के अलावा सचिव स्तर के कुछ अधिकारी हैं। राष्ट्रपति से लेकर कैबिनेट स्तर के सचिव लाल बत्ती के साथ हूटर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और कैबिनेट मंत्री भी लाल बत्ती के साथ हूटर का इस्तेमाल करते हैं। जबकि राज्यमंत्री केवल लाल बत्ती का इस्तेमाल करते हैं।

लाल बत्ती और नीली बत्ती के अलावा पीली बत्ती भी होती है। लेकिन इसका इस्तेमाल इनकम टैक्स कमिश्नर, रेवेन्यू कमिश्नर, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक ही करते हैं। हालांकि पुलिस अधिकारियों और रक्षा मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को लाल बत्ती लगाने की छूट है।

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