Anya Smachar

केंद्रीय मंत्री अनिल माधव दवे का देहांत, वसीयत में लिखा था…

अनिल माधव दवे

नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अनिल माधव दवे का 61 वर्ष की उम्र में गुरुवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में देहांत हो गया। अनिल माधव दवे के सम्मान में आज देश के सभी सरकारी भवनों में राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुका दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे व्यक्तिगत क्षति बताया। केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को अनिल दवे के विभागों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।





गृह मंत्रालय ने गुरुवार को गंभीर दु:ख के साथ अनिल माधव दवे की मृत्यु की घोषणा की। मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने दिवंगत के सम्मान फैसला किया है कि दिल्ली और सभी राज्यों व संघ शासित प्रदेशों में जहां राष्ट्रीय ध्वज को नियमित रूप से फहराया जाता है, वहां आज ध्वज को आधा झुका दिया जाएगा। इसके अलावा जहां उनका अंतिम संस्कार होगा उस दिन वहां राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल नेटवर्किंग साइट ‘ट्विटर’ पर जारी संदेश में कहा- ‘दोस्त और एक आदर्श साथी के तौर पर अनिल माधव दवे जी की निधन पर दुखी हूं। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। लोक हित के काम के लिए दवे जी को याद रखा जाएगा। कल शाम ही वह मेरे साथ थे, हमने कुछ पॉलिसी इश्यू पर चर्चा भी की थी। उनका जाना मेरे लिए निजी क्षति है।’ बता दें कि अनिल माधव बुधवार रात तक प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक में मौजूद थे।

उल्लेखनीय है कि अनिल माधव दवे का जन्म 06 जुलाई 1956 को उज्जैन में हुआ। मध्य प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी के 2009 से राज्यसभा सदस्य थे। दवे 05 जुलाई 2016 को केंद्रीय मंत्री बने थे, वह मध्यप्रदेश भाजपा का बड़ा चेहरा थे।

दवे ने वसीयत में जताई इच्छा, मेरी स्मृति में पेड़ लगाएं तो खुशी होगी

राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री अनिल दवे ने अपनी मृत्यु से काफी पहले एक वसीयत भी लिख दी थी, जिसमें यह उल्लेख है कि उनकी मृत्यु के बाद क्या किया जाना चाहिए। दिवंगत नेता ने अपनी इस वसीयत में लिखा था कि उनकी स्मृति में यदि पेड़ लगाए जाएं, तो उन्हें प्रसन्नता होगी।

उनके निधन के बाद उनकी एक वसीयत भी सामने आई है, जिस पर हस्ताक्षर करने के बाद दिवंगत नेता ने अपने हाथों से 23 जुलाई, 2012 की तारीख डाली है। उन्होंने अपनी वसीयत में लिखा है कि यदि संभव हो, तो उनका अंतिम संस्कार होशंगाबाद जिले के बांद्राभान में उसी स्थान पर किया जाए, जहां नदी महोत्सव का आयोजन किया जाता रहा है। उन्होंने आगे लिखा है कि अंतिम संस्कार की सभी उत्तर क्रिया वैदिक कर्म के साथ ही संपन्न कराई जाए, जिसमें किसी भी प्रकार का आडंबर या दिखावा न हो। सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले दवे ने वसीयत में लिखा है कि मेरी मौत के बाद मेरी स्मृति में कोई स्मारक, प्रतियोगिता, पुरस्कार, प्रतिमा आदि स्थापित न की जाए। साथ ही उन्होंने लिखा है कि जो लोग उनकी स्मृति में कुछ करना चाहते हैं, वे यदि पेड़ लगाने और उन्हें संरक्षित करने का बड़ा काम करेंगे, तो उन्हें प्रसन्नता होगी। इसी तरह नदी-जलाशयों के संरक्षण का कार्य भी किया जा सकता है।

Comments

Most Popular

To Top