Anya Smachar

यह है ISIS के खुरासान मॉड्यूल की पूरी जन्म कुंडली

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में ट्रेन धमाके और लखनऊ में एनकाउंटर में मारे गए आतंकी सैफुल्लाह के बाद अगर कुछ चर्चा में आया है तो वह है विश्व के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ ईराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) के खुरासान मॉड्यूल का। खुरासान माड्यूल आईएसआईएस का वह हिस्सा है जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान में काम करता है और भारत पर निगाहें हैं।





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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को आशंका है कि पिछले साल केरल से गायब हुए 22 नौजवान अफगानिस्तान में आईएसआईएस के गुर्गों के साथ प्रशिक्षण हासिल करने में लगे हैं। इस इलाके में आईएसआईएस का खुरासान मॉड्यूल सबसे ज्यादा सक्रिय है। दरअसल, आईएसआईएस का खुरासान मॉड्यूल पाकिस्तान के तहरीक-ए-तालिबान का एक हिस्सा है, जो खुरसान मॉड्यूल के नाम से जाना जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जनवरी 2015 में इस्लामिक स्टेट ने अपनी ख़ुरासान ब्रांच स्थापित करने की घोषणा की थी। आईएस की मैगजीन दाबिक के मुताबिक यहां दुनिया को अलग-अलग नामों से बांटा गया है। खुरासान उस हिस्से का नाम है जिसमें भारत और पाकिस्तान भी शामिल है और इनका हेडक्वार्टर अफगानिस्तान में है।

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खुरसान मॉड्यूल को आईएसआईएस के अबू बक्र अल-बगदादी गुट का वफादार माना जाता है। इसमें अफगानिस्तान-पाकिस्तान-तुर्कमेनिस्तान इलाके में सक्रिय कई तरह के आतंकवादी शामिल हैं। हाल में काबुल के सुप्रीम कोर्ट के नजदीक हुए हमले जिसमें 20 से ज्यादा लोगों की जान गई और पाकिस्तान के लाल शाहबाज कलंदर दरगाह पर हुए हमले, जिसमें 80 से ज्यादा लोगों की जान गई थी, की जिम्मेदारी खुरासान मॉड्यूल ने ही ली थी।

इस्लामिक स्टेट ने अफगानिस्तान के हेलमंद, ज़ाबुल, फ़राह, लोगार और नंगरहार अपनी मौजूदगी का अहसास कराया था। इसके साथ ही पहली बार ऐसा हुआ था जब इस्लामिक स्टेट ने अफ़गान तालिबान को सीधी चुनौती दी। ऐसा करके इस्लामिक स्टेट अफ़गान तालिबान लड़ाकों को खदेड़ना चाहता था और ये भी चाहता था कि तालिबान-अलक़ायदा गठबंधन में शामिल लड़ाके उससे हाथ मिला लें।

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जानकारी के अनुसार, खुरासान ग्रुप के आतंकी सीरिया से तमाम देशों में अपने स्लीपर सेल के संपर्क में रहते हैं। उन्हें साजिश के बारे में बताते हैं। ये ऑनलाइन बम बनाने और धमाके की ट्रेनिंग भी देते हैं। आतंकियों के आका इसके लिए वीडियो कॉलिंग और टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप का भी इस्तेमाल करते हैं। वैसे तो बगदाद में आईएसआईएस आतंकियों की भर्ती करता है लेकिन भारत के लिए यह बांग्लादेश की ब्रांच की मदद से आतंकियों की भर्ती करता है। बांग्लादेश के ढाका में कैफे में आतंकी हमले की पीछे इसी समूह का हाथ माना जाता है।

2016 में हुई थी कई गिरफ्तारियां

2016 में हैदराबाद के 6 युवकों को कोलकाता में पकड़ा गया था। खुलासा हुआ कि ये आतंकी बांग्लादेश के रास्ते सीरिया जाने की फिराक में थे। ढाका में आईएसआईएस के आतंकियों से इन्हें मिलना था। दिसंबर 2016 में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) ने दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से देश के अलग-अलग शहरों में छापेमारी की थी और आईएसआईएस के खुरासान ग्रुप के 17 सदस्यों को पकड़ा था। ठाणे के तीन युवकों के सीरिया जाकर खुरासान ग्रुप के साथ मिल जाने का भी खुलासा हुआ था।

एनआईए को आशंका है कि पिछले साल केरल से गायब हुए 22 नौजवान अफगानिस्तान में आईएसआईएस के गुर्गों के साथ प्रशिक्षण हासिल करने में लगे हैं। इस इलाके में आईएसआईएस का खुरासान मॉड्यूल सबसे ज्यादा सक्रिय है।

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