Anya Smachar

जस्टिस करनन का मेडिकल परीक्षण कराया जाए : सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस सीएस करनन

नई दिल्ली। कोलकाता हाईकोर्ट के जज जस्टिस सीएस करनन के खिलाफ अवमानना मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी कोर्ट, कमीशन और ट्रिब्यूनल को आदेश दिया कि आठ फरवरी के बाद के जस्टिस करनन के द्वारा पारित किसी भी आदेश का संज्ञान नहीं लें। कोर्ट ने कहा कि जस्टिस करनन इस स्थिति में नहीं हैं कि अपना बचाव कर सकें। इसलिए उनका मेडिकल परीक्षण कराया जाए।





सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के अस्पताल में उनका मेडिकल परीक्षण पांच मई को कराने का आदेश दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में आठ मई तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी को कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए पुलिस​ की एक टीम गठित करने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 9 मई को होगी।

जस्टिस सीएस करनन अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान पेश नहीं हुए

जस्टिस सीएस करनन आज अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में पेश नहीं हुए। अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट के पिछले 31 मार्च के आदेश को पढ़कर सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस करनन द्वारा पारित आदेश को नोट किया जिसमें जस्टिस करनन को न्यायिक कार्यों से हटा दिया गया है।

अटार्नी जनरल ने कहा कि जस्टिस करनन के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अब तो उन्होंने आठवें जज के खिलाफ भी आदेश जारी कर दिया है। उन्हें पर्याप्त समय दिया गया था। कोर्ट का वक्त ऐसे ही बर्बाद नहीं होना चाहिए। चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा कि सभी तरह से उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया। रोहतगी ने कहा कि उनके लिए सुप्रीम कोर्ट ने काफी धैर्य का परिचय दिया है। वकील केके वेणुगोपाल ने कहा कि जस्टिस करनन द्वारा पारित किए गए दो आदेशों से साफ लगता है कि उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जा सकता है। उन्होंने पूरी चेतना के साथ कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं किया है।

कोर्ट ने पूछा कि क्या वह अपना बचाव करने की स्थिति में है तो वेणुगोपाल ने कहा कि नहीं। वह जून में रिटायर हो रहे हैं इसलिए अवमानना के मामले में जेल भेजने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि जस्टिस करनन की काउंसलिंग की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि अब दूसरा आदेश देने की जरूरत नहीं है और जून में रिटायर होने से अवमानना याचिका खत्म नहीं हो सकती है। मुकुल रोहतगी ने कहा कि लोग कोर्ट में इसलिए आते हैं क्योंकि उन्हें जजों पर भरोसा होता है। जस्टिस करनन आए दिन प्रेस कांफ्रेंस करते हैं।

छोटी जाति में जन्म लेने का मिल रहा है दंड: करनन 

उधर मानसिक जांच के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बौखलाये जस्टिस करनन ने सोमवार को महानगर कोलकाता में संवाददाताओं से बात करते हुये कहा कि छोटी जाति में जन्म लेने के कारण ही उन्हें सजा दी जा रही है।

करनन ने कहा कि मैंने सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जजों की छोटी मानसिकता को उजागर किया था, इसीलिए अब मुझे पागल साबित करने की कोशिश हो रही है। यह पूछने पर कि वह सुप्रीम कोर्ट में हाजिर होकर अपना पक्ष क्यों नहीं रख रहे हैं, उन्होंने कहा कि उन जजों की मानसिकता जब तक नहीं बदलती तब तक हाजिर होने का कोई औचित्य नहीं है।

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