Anya Smachar

जनमत संग्रह : तुर्की के राष्ट्रपति को मिला बहुमत

तुर्की

अंकारा। तुर्की में शासन की राष्ट्रपति प्रणाली लाए जाने को लेकर कराए गए जनमत संग्रह में राष्ट्रपति रिसेप तैयप एर्दोगान को स्पष्ट बहुमत मिला है, लेकिन विपक्ष ने परिणाम को चुनौती देने की घोषणा की है। अब एर्दोगान देश में राष्ट्रपति शासन प्रणाली अपनाएंगे और साल 2019 तक राष्ट्रपति बने रह सकते हैं। यह जानकारी सोमवार को मीडिया रिपोर्ट से मिली।





बीबीसी के अनुसार, जनमत संग्रह में 51.37 फ़ीसदी लोगों ने राष्ट्रपति शासन प्रणाली के पक्ष में ‘हां’ को वोट किया, जबकि करीब 48.63 फ़ीसदी लोगों ने ‘ना’ में वोट किया है। एर्दोगान के समर्थकों का कहना है कि राष्ट्रपति शासन प्रणाली देश में कारगर साबित होगी और इससे तुर्की का आधुनिकीकरण होगा, जबकि विरोधी मानते हैं कि इससे निरंकुशता को बढ़ावा मिल सकता है।

तुर्की

जनमत संग्रह में वोटर के पास सिर्फ हां या न का ही विकल्प था

इस बीच देश की दोनों विपक्षी पार्टियों ने इस फ़ैसले को चुनौती देने का ऐलान किया है। रिपब्लिकन पीपल्स पार्टी (सीएचपी) ने 60 फ़ीसदी वोटों की दोबारा गिनती की मांग की है। विपक्षी पार्टियों ने बिना मुहर लगे मतपत्रों को अन्यथा साबित होने तक वैध माने जाने के फ़ैसले की निंदा की है। उनका मानना है कि इतने व्यापक बदलाव के लिए जीत का इतना कम अंतर पर्याप्त नहीं है।

उल्लेखनीय है कि देश भर में एक लाख 67 हज़ार पोलिंग बूथों पर करीब साढ़े 5 करोड़ लोग अपने मताधिकार के उपयोग करने के लिए योग्य हैं। कथित तौर पर 85 प्रतिशत मतदान हुआ था। एर्दोगान संवैधानिक परिवर्तन के सबसे व्यापक कार्यक्रम का प्रतिनिधित्व करेंगे, क्योंकि तुर्की एक सदी पहले गणतंत्र बन गया था।

तुर्की

जनमत संग्रह में “न” के पक्ष में इन महिलाओं ने अभियान चलाया था

राष्ट्रपति के पास कैबिनेट मंत्रियों को नियुक्त करने, फैसले जारी करने, वरिष्ठ न्यायाधीश चुनने और संसद को भंग करने के अधिकार मिल जाएंगे। नई प्रणाली में प्रधानमंत्री के पद को ख़त्म कर दिया जाएगा और सारी शक्तियां राष्ट्रपति के हाथों में दे दी जाएंगी जिसमें देश की नौकरशाही भी उनके नियंत्रण में होगी।

एर्दोगान का कहना है कि तख़्तापलट की कोशिश के बाद पिछले नौ महीनों में तुर्की की सुरक्षा को जिन चुनौतियों का सामना पड़ा है उससे निपटने और गठबंधनों की सरकार से बचने के लिए यह बदलाव ज़रूरी है।

संविधानिक मसौदा :

  • अगले राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव 3 नवंबर 2019 को होंगे।
  • राष्ट्रपति का शासन काल पांच साल का होगा और अधिकतम दो कार्यकाल तक होगा।
  • राष्ट्रपति को सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों को सीधे नियुक्त करने का अधिकार होगा।
  • एक या उससे अधिक उप राष्ट्रपति रखने का अधिकार राष्ट्रपति के पास होगा।
  • प्रधानमंत्री के पद को ख़त्म कर दिया जाएगा।
  • राष्ट्रपति के पास न्यायिक मामलों में दखलंदाज़ी का अधिकार होगा।
  • राष्ट्रपति तय करेंगे कि आपातकाल की स्थिति को लागू किया जाए या नहीं।

Comments

Most Popular

To Top