Anya Smachar

रैनसमवेयर साइबर हमले के पीछे उत्तर कोरिया के हैकर्स!

नई दिल्ली: रैनसमवेयर हमले की भारत समेत 150 से ज्यादा देशों के दो लाख से ज्यादा संस्थान/कंपनियां प्रभावित हुई हैं लेकिन इसके पीछे कौन है इस बात का पता भारतीय मूल के एक शख्स ने लगा लिया है। इस शख्स का नाम नील मेहता है और वह विश्व की सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल में काम करते हैं। नील मेहता ने आशंका जाहिर की है कि रैनसमवेयर साइबर हमले के पीछे उत्तर कोरिया के हैकर्स हो सकते हैं।





बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अनुसार नील मेहता नाम के भारतीय मूल के शख्स ने एक कोड प्रकाशित किया है। इसे रूस की एक साइबर सुरक्षा कंपनी ने अभी तक का सबसे अहम सुराग बताया है। जांचकर्ताओं के अनुसार, शुक्रवार को हुए रैनसमवेयर हमले में इस्तेमाल कुछ कोड, जिन्हें वानाक्राई सॉफ्टवेयर कहा जाता है, लाजारूस समूह द्वारा इस्तेमाल कोड के समान है।

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लाजारूस उत्तर कोरिया के उन्हीं हैकरों का एक समूह है जिसने 2014 में सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट को नुकसान पहुंचाने वाली हैकिंग के लिए भी इसी तरह का तरीका अपनाया था। पिछले साल बांग्लादेश सेंट्रल बैंक की हैकिंग में भी इसी तरह के कोड इस्तेमाल किए गए थे।

नील मेहता द्वारा की गई खोज के बाद सुरक्षा विशेषज्ञ इस ताजा साइबर हमले के तार लाजारूस समूह से जोड़ रहे हैं। नील मेहता को वानाक्राई और अन्य सॉफ्टवेयर के कोड के बीच समानताएं नजर आई थीं।

गौरतलब है कि रैनसमवेयर साइबर हमले से 150 से ज्यादा देशों में 2,00,000 इकाइयां प्रभावित हुई हैं। इसे अपने तरह का सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है। माइक्रोसॉफ्ट के XP जैसे पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) पर चलने वाले कंप्यूटर इस मालवेयर से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इसके प्रभाव से कंप्यूटर की सभी फाइल लॉक हो जा रही हैं और उसके बाद हैकर्स फिरौती मांग रहे हैं। रैनसमवेयर हमले की पहचान सबसे पहले अमेरिकी खुफिया विभाग ने की।

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