Anya Smachar

निर्भया रेप केस : गुनहगारों की फांसी की सजा पर सुप्रीम मुहर

निर्भया-के-दोषी

नई दिल्ली। 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप के चारों अभियुक्तों की फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी है। फैसला दो खंडों में आया है लेकिन दोनों में ही फांसी की सजा पर मुहर लगाई गई है। फैसला सुनाते समय निर्भया के मां-पिता दोनों कोर्ट में मौजूद थे। फैसला सुनने के बाद निर्भया की मां के आंखों से आंसू निकल आए। जब जजों ने चारों अभियुक्तों को फांसी की सजा पर मुहर लगाने का फैसला सुनाया तो कोर्ट में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर फैसले का स्वागत किया।





दो जजों ने 315 पेज का और एक ने 114 पेज का फैसला दिया

जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण ने 315 पेजों का फैसला दिया है जबकि जस्टिस आर. भानुमति ने 114 पेज का फैसला दिया है। फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेक्स और हिंसा की भूख के चलते बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया। जिस तरह का अपराध हुआ ऐसा लगता है कि ये दूसरी दुनिया की कहानी है। पुलिस की जांच से दोषियों का गुनाह साबित हुआ है। आपराधिक साजिश प्रमाणित हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कोई गलती नहीं की है। फैसले के बाद निर्भया के पिता ने कहा कि आज हमारी बेटी को इंसाफ मिला है। मैं इस फैसले से खुश हूं।

महिलाओं को कमजोर बताना मानहानि है

जस्टिस आर. भानुमति ने जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण के फैसले से सहमति जताते हुए महिलाओं के खिलाफ अपराध पर चिंता जताई है। उन्होंने राष्ट्रपति महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए कहा है कि महिलाओं को कमजोर बताना मानहानि है और ये पुरुष का महिला के साथ अन्याय है। अगर नैतिक बल को ताकत माना जाए तो महिलाएं पुरुषों से ऊपर हैं। जस्टिस भानुमति ने 2015 के नेशनल क्राइम एगेंस्ट वुमन का आंकड़ा देते हुए कहा है कि उस साल महिलाओं के खिलाफ तीन लाख सत्ताइस हजार तीन सौ चौरानबे अपराध हुए जो 2011 से करीब 43 फीसदी ज्यादा थे।

बच्चे को महिला का सम्मान करने के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए

जस्टिस भानुमति ने अपने फैसले में कहा है कि आज समाज में महिलाओं का सम्मान करना जरुरी है महिलाओं के प्रति मानसिकता बदलने की जरूरत है। एक बच्चे को महिला का सम्मान करने के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए। स्कूलों के सिलेबस में लैंगिक समानता की बातें पढ़ाई जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह एक हिला देने वाली घटना थी। ये कल्पना करना मुश्किल है कि पीड़िता छह लोगों की हवस का शिकार हुई। पीड़िता की पूरी आंत को छेद दिया गया और अंदरूनी अंगों को बाहर निकाल दिया गया। गैंगरेप केस के चारों दोषियों मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा व अक्षय ठाकुर की फांसी बरकरार रखी है। मुख्य अभियुक्त ड्राइवर राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित रूप से खुदकुशी कर ली थी, जबकि एक नाबालिग आरोपी अपनी तीन साल की सुधारगृह की सजा पूरी कर चुका है।

याचिकाकर्ता अभियुक्तों की तरफ से वकील एमएल शर्मा और एपी सिंह पेश हुए थे जबकि वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने दिल्ली सरकार की तरफ से दलीलें पेश की थीं। वहीं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकीलों संजय हेगड़े और राजू रामचंद्रन को एमिकस क्युरी नियुक्त किया था। 27 मार्च को एमिकस क्युरी संजय हेगड़े ने अभियुक्तों के वकीलों की प्रशंसा करते हुए कहा था कि आज के समय में ये कहना बहुत आसान है कि हम फलां-फलां की मदद नहीं करेंगे। लेकिन उसके बावजूद एमएल शर्मा और एपी सिंह ने अपने मुवक्किल की बात रखी।

आपको बता दें कि पिछले साल 11 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई जल्द निपटाने पर राजी हुआ था और 18 जुलाई से हर सोमवार और शुक्रवार को दो बजे से इस मामले पर सुनवाई का फैसला किया था।

गैंगरेप के चार दोषियों मुकेश, अक्षय, पवन और विनय को साकेत की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिस पर 14 मार्च 2014 को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मुहर लगा दी थी। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी जिस पर सुनवाई करते हुए फांसी की सजा पर रोक लगाई थी।

16 दिसंबर 2012 की रात का घटनाक्रम 

शाम के 6.30 बजे से 8.30 बजे- छात्रा और उसके दोस्त ने साकेत के सिलेक्ट सिटी वॉक में फिल्म देखी।
8.30 बजे- ऑटो वाले से द्वारका के मधु विहार (छात्रा के घर) जाने लिए कहा, लेकिन ऑटो वाला मुनीरका से आगे जाने को राजी नहीं हुआ।
9.10 बजे- ऑटो वाले ने इन दोनों को मुनीरका बस स्टॉप पर छोड़ दिया। दोनों वहां रूट नंबर 764 की बस का इंतजार करने लगे। तभी  सफेद रंग की एक चार्टर्ड बस वहां आकर रूकी। बस कंडक्टर ने दस-दस रुपए में उनको छोड़ देने को कहा। छात्रा और उसका दोस्त बस में सवार हो गए। बस में 6 लोग सवार थे। इनमें से तीन लोगों ने छात्रा के साथ छेडख़ानी शुरु कर दी। छात्रा के दोस्त ने विरोध किया तो उन लोगों ने उसे पीटना शुरु कर दिया। लोहे की रॉड  से पीट-पीट कर उसे लहुलुहान कर दिया। इसके बाद लड़की को पीछे की सीट पर ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया गया।
10.15 बजे रात- महिपालपुर इलाके में फ्लाईओवर के पास लड़के और लड़की को निर्वस्त्र करके फेंक दिया गया।
10.20 बजे -हाईवे टोल कंपनी के स्टाफ के लोगों ने दोनों को इस हाल में देखा तो पुलिस को फोन किया। लेकिन यह फोन गुडगांव पुलिस कंट्रोल रूम को  लगा।
10.22 बजे- दिल्ली पुलिस के कंट्रोल रूम को इस वारदात की कॉल मिली।
10.24 बजे- पुलिस कंट्रोल रूम ने यह सूचना इलाके में तैनात पीसीआर की गाड़ी पर तैनात पुलिस को दी।
10.28 बजे- पीसीआर की गाड़ी मौके पर पहुंची।
10.55 बजे- पीसीआर ने दोनों को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया।

आगे इस मामले में कब क्या हुआ ?

17-12-2012 को वसंत विहार थाने में सामूहिक बलात्कार, कुकर्म, अपहरण, हत्या की कोशिश और लूट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस को तफ्तीश के दौरान अपराध के रास्ते में पडऩे वाले 4 स्थानों पर लगे सीसीटीवी फुटेज में वारदात में इस्तेमाल सफेद रंग की बस दिखाई दी। बस पर यादव लिखा हुआ था। बस के बारे में छात्रा के दोस्त ने पुलिस को बताया था। इस अहम सुराग के आधार पर पुलिस बस के मालिक दिनेश यादव तक पहुंच गई। 17 दिसंबर को आरकेपुरम इलाके में बस मिल गई और उसमें ही मुख्य आरोपी बस चालक राम सिंह भी मिल गया। राम सिंह से पूछताछ के बाद इस अपराध में शामिल उसके भाई मुकेश के अलावा  विनय शर्मा और पवन गुप्ता को भी पकड़ लिया गया।
18 दिसंबर 2012: लड़की के साथ हुई दरिंदगी की पूरी जानकारी सामने के बाद देश भर में गुस्से की आग भड़की। संसद में तब की नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने दोषियों के लिए फांसी की मांग की।
20 दिसंबर 2012: बड़ी संख्या में छात्रों ने दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के घर के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया।
21-22 दिसंबर 2012: घटना का 5वां आरोपी भी पकड़ा गया। वह नाबालिग था। छठा आरोपी अक्षय ठाकुर बिहार से गिरफ्तार हुआ।
22 दिसंबर 2012: निर्भया कांड पर लोग सड़कों पर उतरे। इंडिया गेट पर युवाओं का भारी विरोध शुरू।
23 दिसंबर 2012: निर्भया की हालत गंभीर। प्रदर्शन के दौरान चोट लगने से पुलिस कांस्टेबल सुभाष तोमर की मौत।
26 दिसंबर 2012: निर्भया को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ हॉस्पिटल ले जाने का फैसला।
29 दिसंबर 2012: सुबह के समय दो बजकर 15 मिनट पर निर्भया की सिंगापुर में मौत।
2 जनवरी 2013: तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर ने मामले की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था कराई।
3 जनवरी 2013: पांच आरोपियों के खिलाफ हत्या, गैंगरेप, अपहरण और अन्य आरोपों में चार्जशीट दाखिल।
28 जनवरी 2013: छठवें आरोपी को नाबालिग पाया गया। उस पर जुवेनाइल कोर्ट में मामला चला।
2 फरवरी 2013: पांचों आरोपियों पर हत्या सहित 13 मामलों में आरोपपत्र दाखिल।
11 मार्च 2013: पांच आरोपियों में से एक रामसिंह ने तिहाड़ जेल के अंदर कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
21 मार्च 2013: नए एंटी-रेप कानून पर मुहर लगी। रेप के लिए फांसी की सजा का प्रावधान किया गया।
11 जुलाई 2013 : नाबालिग को मामले में दोषी पाया गया। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग को तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेजा। यह किसी भी नाबालिग के लिए अधिकतम सजा है।
10 सितंबर 2013: चार अन्य बालिग आरोपियों को भी कोर्ट ने मामले में दोषी पाया। 13 मामलों में उन्हें दोषी पाया गया।
13 सितंबर 2013: चारों आरोपियों मुकेश, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर को मौत की सजा सुनाई गई।
7 अक्टूबर 2013: चार में से दो विनय ठाकुर और अक्षय ठाकुर ने सजा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की।
13 मार्च 2014: दिल्ली हाईकोर्ट ने चारों आरोपियों को फांसी की सजा के फैसले को सही ठहराया।
2 जून 2014: फिर से दो आरोपियों ने हाईकोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की।
14 जुलाई 2014: सुप्रीम कोर्ट ने चारों आरोपियों की फांसी पर सुनवाई पूरी होने तक के लिए रोक लगाई।
18 दिसंबर 2015: नाबालिग की रिहाई से कोर्ट का इनकार। तीन साल की सजा पूरी कर बाहर निकला।
27 मार्च 2017: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा।

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