Anya Smachar

VRS चाहने वाले नौकरशाहों को मोदी सरकार का तोहफा

वीआरएस

नई दिल्ली: स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) चाहने वाले नौकरशाहों को मोदी सरकार ने तोहफा दिया है। दरअसल, अब उनकी अर्जी को ज्यादा समय तक लंबित नहीं रखा जाएगा। उनकी अर्जी को उनके द्वारा दी गई समय सीमा के अन्दर ही स्वीकार किया जाएगा।





नौकरशाहों के लिए यह बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब कुछ नौकरशाहों ने उन्हें परेशान किए जाने की शिकायतें की थीं। कुछ नौकरशाहों ने दावा किया था कि उनके अनुरोध को लंबे वक्त तक लंबित रखा गया। नए नियम नौकरशाहों को उनके स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति आग्रह को वापस लेने की भी अनुमति देते हैं।

नए नियम में क्या है

  • कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय (डीओपीटी) के नए नियमों के अनुसार, किसी आईएएस और आईपीएस अधिकारी द्वारा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आग्रह इन अनुरोधों में उनके द्वारा बताए गए नोटिस काल से ज्यादा लंबित नहीं रखा जाएगा।
  • अगर संबंधित प्राधिकार किसी सेवा सदस्य द्वारा बताए गए नोटिस काल की समाप्ति से पहले कोई आदेश जारी नहीं करता है, तो उस समयावधि की तारीख के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति अमल में आ जाएगी।
  • जब संबंधित प्राधिकार द्वारा कोई आदेश जारी नहीं किया जाता तो नोटिस में दी गई समयावधि की समाप्ति के बाद केंद्र सरकार आदेश जारी कर सकती है।
  • नए नियम तीनों अखिल भारतीय सेवाओं भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय वन सेवा (आईएफओएस) पर लागू है।
  • स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का नोटिस वापस लेने का अनुरोध नोटिस में दिए गए समय के भीतर संबंधित प्राधिकार को सौंपा जाएगा।

आपको बता दें कि फिलहाल एक सदस्य को 60 वर्ष की उम्र से पहले संबंधित राज्य सरकार को लिखित में तीन महीने का नोटिस देने के बाद उस दिन या इन अनुरोधों में दी गई बाद की किसी तारीख से सेवानिवृत्ति की अनुमति देते हैं, जिस दिन वह क्वालीफाइंग सेवा में बीस वर्ष पूरा करता है।

पहले शर्तों पर होती थी वीआरएस अर्जी

इससे पहले यह नियम था कि आईएएस, आईपीएस या आईएफओएस अधिकारी अपनी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का नोटिस तभी वापस ले सकता है जब राज्य सरकार इसे स्वीकार कर लेती थी।

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