Anya Smachar

गोरखा फौजी का जुनून, 86 की उम्र में फिर एवरेस्ट फतह की तैयारी

मिन बहादुर

नाम: मिन बहादुर शेर्चन





उम्र: 86 साल

मिशन: एवरेस्ट फतह

काठमांडू। एवरेस्ट…! दुनिया की सबसे ऊंची चोटी। जिस पर जाने के लिए सपने तो बहुत लोग देखते हैं लेकिन अब तक कुछ ही लोगों के सपने पूरे हुए हैं। लेकिन एक इंसान ऐसा भी है जिसने पहले 76 वर्ष की उम्र में एवरेस्ट फतह कर सबसे अधिक उम्र में यह उपलब्धि हासिल करने का गौरव प्राप्त किया था और अब वह फिर से एवरेस्ट को फतह करना चाहता है… कारण, उसका रिकॉर्ड किसी और ने तोड़ दिया है। उस शख्स को यही मलाल है। उम्र के ऐसे पड़ाव पर लोग अक्सर थक कर बैठ जाते हैं लेकिन 86 वर्षीय मिन बहादुर शेर्चन फिर विश्व रिकॉर्ड बनाने का सपना बुन चुके हैं। कल बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर उन्होंने अपने इरादे का ऐलान किया।

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मिन बहादुर शेर्चन एवरेस्ट फतह का अपना पिछला सर्टिफिकेट दिखाते हुए (फ़ाइल फोटो)

2008 में मिन ने 76 साल की आयु में पहली बार एवरेस्ट फतह किया था। उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज था। लेकिन यह रिकॉर्ड 2013 में चीन के योशिनो मियूरो ने तोड़ दिया। मियूरो ने 80 वर्ष की उम्र में एवरेस्ट को फतह कर यह खिताब अपने नाम किया था। अब मिन बहादुर को अपना खिताब वापस लेने की धुन सवार हो गई है। हालांकि वह कहते हैं कि उनका मकसद मियूरो का रिकार्ड तोड़ना नहीं है बल्कि खुद अपना रिकार्ड तोड़ना है। 2008 में जब उन्हें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल किया गया था तब उस एवरेस्ट मिशन में मियूरो भी शामिल थे लेकिन उस वक्त मिन ने बाजी मार ली थी।

2015 में आधे रास्ते से आना पड़ा था वापस

दरअसल, जब 2013 में विश्व रिकॉर्ड टूटने के बाद से ही मिन बहादुर तैयारियां शुरू कर चुके थे। 2015 में भी उन्होंने इसके लिए कोशिश की थी, लेकिन नेपाल में आए भूकंप और फिर हिमस्खलन की वजह से उन्हें आधे रास्ते से ही वापस आना पड़ा था। इसका मलाल उनके चेहरे पर साफतौर पर दिखाई भी देता है।

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मिन बहादुर शेर्चन और चीन के योशिनो मियूरो (दाएं)

गोरखा आर्मी के सदस्य थे मिन

मिन कहते हैं कि वह इस बार सिर्फ अपनी ताकत को आजमाना चाहते हैं और खुद को साबित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई निजी प्रतिस्पर्धा नहीं है, न ही किसी को हराने की बात है। मिन बहादुर पूर्व ब्रिटिश गोरखा आर्मी के सदस्य रह चुके हैं। मिन बहादुर ने बेहद कम उम्र में ब्रिटिश गोरखा आर्मी ज्वाइन की थी। मिन कहते हैं कि वह हमेशा से ही चुनौतियों को पसंद करते हैं। उनका कहना है कि वह दुनिया छोड़ने से पहले कुछ अलग करके दिखाना चाहते हैं, जो पहले किसी ने न किया हो।

मिन बहादुर फिलहाल एवरेस्ट पर जाने के लिए बेहतर मौसम होने का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि मई में मौसम कुछ बेहतर होता है और उस वक्त कई पर्वतारोही अपने मिशन की शुरुआत करते हैं, वह भी ऐसा ही करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि एवरेस्ट के रास्ते में आने वाली रुकावटें और परेशानियां उन्हें रोक नहीं सकती।

नेपाल माउंटेनियरिंग एसोसिएशन कसमकस में

नेपाल माउंटेनियरिंग एसोसिएशन मिन के इस फैसले से अचंभित है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अंग टेजरिंग शेरपा को मिन के दावे पर कुछ शक है। वह उनकी बढ़ती उम्र और वहां की मुश्किलों को लेकर कुछ गंभीर हैं। लेकिन वह मानते हैं मिन बहादुर का हौसला और उनकी हिम्मत वास्तव में कमाल की है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष कुल 450 पर्वतारोहियों को एवरेस्ट पर जाने की इजाजत मिली थी। वहीं वर्ष 2015 में रद हुए समिट के भी कुछ पर्वतारोहियों को इसमें दोबारा मौका दिया गया था।

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