Anya Smachar

मालदीव के फाफू ने बढ़ाई भारत की चिंता

फाफू (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली: मालदीव के अपने 26 टाफू में से एक फाफू को बेचने के निर्णय ने भारत की फिक्र बढ़ा दी है। मालदीव सरकार ने फाफू को सउदी अरब को बेचने का फैसला लिया है। सरकार के फैसले का विरोध करते हुए विपक्षी दलों का कहना है कि इससे वहाबी विचारधारा को और मजबूत होने का मौका मिलेगा, जिससे मालदीव में आतंकवाद का प्रचार-प्रसार हो सकता है। आपको बता दें कि 2015 में मालदीव सरकार ने एक फैसला किया जिसके तहत विदेशी नागरिक जमीन खरीद सकते हैं।





मिली जानकारी के मुताबिक, सऊदी अरब के बादशाह सलमान बिन अब्दुलअजीज बहुत जल्द मालदीव का दौरा करने वाले हैं, जिसमें औपचारिक तौर से फाफू अटॉल के बेचने की प्रक्रिया संपन्न होगी। विपक्षी दल एमडीपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री अहमद नसीम ने कहा कि मौजूदा सरकार जनभावनाओं का सम्मान नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि मालदीव में जमीन की समस्या के चलते विदेशियों को जमीन बेचने पर पाबंदी थी, जो लोग दोषी पाए जाते थे उन्हें फांसी की सजा दी जाती थी।

मुख्य विपक्षी दल एमडीपी का कहना है कि सऊदी अरब के दबाव में मालदीव ने इरान से 41 साल पुराना संबंध तोड़ दिया। सऊदी सरकार हर वर्ष 300 विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप देती है जो वहाबी विचार को मानते हैं, मालदीव के मौजूदा राष्ट्रपति यामीन सऊदी अरब से इस्लामिक शिक्षक लाकर स्कूलों को मदरसों में बदलना चाहते हैं।

हालांकि, भारत सरकार का हमेसा से इस मसले पर यही कहना रहा है कि ये मालदीव का आंतरिक मामला है लिहाजा दखल नहीं देना चाहिए। लेकिन अब मालदीव में अगले साल होने वाले चुनाव से पहले भारत सरकार कोई औपचारिक प्रतिक्रिया दे सकती है। हाल ही में विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर ने माले का दौरा किया था और कहा कि भारत हमेशा से ये चाहता रहा है कि मालदीव में शांति और स्थिरता कायम रहे।

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