Anya Smachar

बिलकिस गैंगरेप केस में 11 की उम्रकैद की सजा बरकरार

नई दिल्ली: गोधरा कांड के समय चर्चित बिलकिस बानो गैंगरेप और मर्डर मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने 11 दोषियों की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने इन दोषियों को निचली अदालत से दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। हालांकि, कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें सीबीआई ने कुछ दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की थी।





बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले में छह आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को भी पलट दिया है। इन आरोपियों में डॉक्टर और पुलिसवाले शामिल हैं। इन छह लोगों पर सबूतों से छेड़छाड़ करने का आरोप है। इनको 20 हजार रुपये जुर्माना देना होगा। ये दोषी ट्रायल के दौरान ही सजा काट चुके हैं, सो उन्हें जेल नहीं जाना होगा। सीबीआई ने दोषियों में से तीन के लिए मृत्युदंड देने की मांग की थी, क्योंकि उसका मानना था कि यह एक गंभीर अपराध और यह एक ‘सामूहिक हत्याकांड’ था। बिलकिस मामले की सुनवाई जनवरी 2005 में शुरू हुई थी।

21 जनवरी, 2008 को मुंबई की कोर्ट ने 11 लोगों को मर्डर और गैंगरेप का आरोपी माना था। जिसके बाद ट्रायल कोर्ट की ओर से सभी को उम्रकैद की सजा दी गई थी। जिसके बाद सभी आरोपियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील की थी। तीन आरोपियों को मौत की सजा सुनाने के लिए 2011 में सीबीआई इस केस को लेकर हाई कोर्ट गई थी। इनमें जसवंत नाई, गोविंद नाई और शैलेश भट्ट शामिल थे।

ये 11 लोग दोषी करार

जसवंत नाई, गोविंद नाई, शैलेश भट्ट, राधेश्याम शाह, बिपिन चंद्र जोशी, केसरभाई वोहनिया, प्रदीप मोरधिया, बाकाभाई वोहनिया, राजूभाई सोनी, मितेश भट्ट, रमेश चंदाना।

क्या हुआ था बिकलिस बानो के साथ

मार्च 2002 में गुजरात की राजधानी अहमदाबाद से 250 किलोमीटर दूर रंधीकपुर गांव में बिलकिस के परिवार पर एक भीड़ ने हमला किया था। उस समय बिलकिस की उम्र 19 साल थी और वह 5 महीने की गर्भवती थी। उसके साथ गैंगरेप किया गया था और उसके परिवार के आठ लोगों की हत्या कर दी गई थी, जिनमें तीन दिन का एक बच्चा और तीन साल की बिलकिस की बेटी भी शामिल थी। गैंगरेप के बाद बिलकिस को पीटा गया और मरा हुआ जानकर छोड़ दिया गया।

पुलिस वालों ने डराया था

पुलिस वालों ने बिलकिस बानो को यह कहकर डराया कि हम डॉक्टर के पास ले जाएंगे वह तुमको जहर की सुई दे देगा। वहीं दो डॉक्टरों ने भी कोई मदद नहीं की और गलत रिपोर्ट भी दी। इसके बाद बिलकिस ने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी। कोर्ट ने यह मामला सीबीआई को सौंपा था और इसका ट्रायल भी गुजरात के बाहर कर दिया था। इस लड़ाई के दौरान उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अलग-अलग रिश्तेदारों के यहां उन्हें मदद लेनी पड़ी, क्योंकि उनकी जान को खतरा हो सकता था।

सीबीआई ने सॉल्व किया केस

सीबीआई ने मामले की जांच के दौरान नीमखेड़ा तालुका से न केवल 12 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था, बल्कि 3 मार्च 2002 को भीड़ द्वारा मारे गए लोगों के शवों को बरामद करने के लिए पन्नीवेल के जंगलों में खुदाई भी करवायी थी। इस कार्रवाई में सीबीआई चार लोगों के कंकाल बरामद करने में सफल रही थी। मामले की पुष्टि के लिए इन कंकालों को डीएनए परीक्षण के लिए भेज दिया गया था।

बिलकिस बानो केस

  • 2002 : गुजरात दंगों के दौरान 19 साल की बिलकिस का सामूहिक बलात्कार, उस समय वह गर्भवती थी
  • दोषियों ने बिलकिस के परिवार के 14 लोगों की हत्या कर दी
  • 25 मार्च 2003: मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सबूतों के भाव में केस बंद किया
  • दिसंबर 2003: सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए
  • अगस्त 2004: निष्पक्ष सुनवाई के लिए मामला मुंबई ट्रायल कोर्ट को सौंपा
  • जनवरी 2008: 12 लोग बलात्कार, हत्या के लिए दोषी करार
  • जनवरी 2008: 2 डॉक्टर और 6 पुलिसकर्मी रिहा कर दिए गए
  • 11 लोगों को उमक़ैद की सज़ा, CBI ने तीन अपराधियों को फ़ांसी देने की अपील की, बचाव पक्ष ने उम्रकैद के ख़िलाफ़ अपील की
  • 04 मई 2017: सीबीआई की कुछ लोगों को मौत की सजा देने वाली अर्जी खारिज की और निचली अदालत से उम्रकैद की सजा पाए दोषियों की सजा बरकरार रखी।

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