Anya Smachar

सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए जस्टिस करनन, दिखाए तेवर

कोलकाता हाईकोर्ट के जज जस्टिस करनन सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए

नई दिल्ली। कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस सी. एस. करनन और सुप्रीम कोर्ट के बीच टकराव ख़त्म होने के बजाय बढ़ता नजर आ रहा है। सर्वोच्च अदालत की कडाई के बाद जस्टिस करनन अपने खिलाफ अवमानना मामले की सुनवाई के लिए आज सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने अदालत से खुद को प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों पर बहाल किए जाने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस करनन के न्यायिक कार्यों को बहाल करने से इनकार किया।





मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम आपको कुछ और समय दे रहे हैं और नौ अप्रैल तक अपना जवाब दाखिल करिए। दूसरी तरफ, जस्टिस करनन झुकाने के मूड में नहीं दिख रहे। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह संविधान पीठ के सातों जजों के खिलाफ आदेश पास करेंगे। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या उन्हें यह अधिकार है तो बोले हाँ। इसके कुछ देर बाद करनन ने सात जजों के खिलाफ आदेश भी जारी कर दिया।

करनन ने कहा, मौका मिले तो प्रमाण भी रख सकते हैं

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा करनन से अपना पक्ष मौखिक या लिखित रखने के सवाल पर जस्टिस करनन ने कहा कि अगर उन्हें मौका मिले तो वह प्रमाण भी रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह निर्दोष हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अवमानना का मामला मेरिट पर तय होना चाहिए। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच ने कई बार जस्टिस करनन को अपना वकील रख कर मामले की कायदे से सुनवाई करने की हिदायत दी। मगर उन्होंने साफ इंकार करते हुए कहा कि मुझे बिना नोटिस न्यायिक कार्यों से रोका गया है जो गलत है, वह माफी नहीं मांगेंगे।

इस पर अटार्नी जनरल ने कहा कि जस्टिस करनन जो कह रहे हैं ये उन्हें पता है। ऐसे में उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही चलेगी। साथ ही उन्होंने बीते 25 मार्च को लिखे करनन के पत्र को पढ़ते हुए कहा कि माफीनामा शर्तों के साथ नहीं आता।

चीफ जस्टिस ने नौ अप्रैल तक अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया 

वहीं सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने कहा कि ये इतना आसान नहीं है। जब जस्टिस करनन को जमानती वारंट जारी किया गया था तो उन्होंने सात जजों का इस्तीफा मांगा और नोटिस को गैरकानूनी बताया था। इस पर जस्टिस करनन ने कहा कि मैं एक संवैधानिक पद पर हूं, एक सम्मानित व्यक्ति हूं लेकिन पुलिस एक अभियुक्त के यहां गई थी संवैधानिक दफ्तर में नहीं गई थी। आप हमारे न्यायिक काम को शुरु करने दीजिए। जिसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि हम आपको कुछ और समय दे रहे हैं और नौ अप्रैल तक अपना जवाब दाखिल करिए।

सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस करनन के न्यायिक कार्यों को बहाल करने से इनकार किया

इस दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस करनन के न्यायिक कार्यों को बहाल करने से इनकार किया। जस्टिस करनन ने कहा कि अगर उनका न्यायिक कार्य बहाल नहीं होता है तो उन्हें जेल भेज देना चाहिए। साथ ही, करनन ने कहा कि अगर उनका न्यायिक कार्य बहाल नहीं किया गया, तो वे अगली तारीख पर नहीं आएंगे।

पूरे मामले पर एक नजर

  • कोलकाता हाईकोर्ट के जस्टिस करनन ने 23 जनवरी को पीएम मोदी को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट के 20 जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे और उनके खिलाफ करप्शन की जांच कराने की मांग की थी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस करनन के इस तरह के खत और अलग-अलग जगह पर दिए गए उनके बयानों का स्वतः संज्ञान लिया हैं।
  • 8 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस करनन के खिलाफ नोटिस जारी कर पूछा था कि क्‍यों ना उनके इस पत्र को कोर्ट की अवमानना माना जाए
  • सुप्रीम कोर्ट ने दो बार जस्टिस करनन को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन करनन इस आदेश को अनसुना करते हुए कोर्ट में हाजिर नहीं हुए।
  • सुप्रीम कोर्ट ने 10 मार्च को उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया और उन्हें 31 मार्च तक कोर्ट के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया।
  • 16 मार्च को सुप्रीम कोर्ट की 7 सदस्यों वाली पीठ को लिखे पत्र में भी करनन ने मुआवजे के तौर पर 14 करोड़ रुपये मांगे थे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने उनसे बतौर जज सारे अधिकार छीन लिए हैं। उन्होंने इस संबंध में एक आदेश जारी कर CJI और बाकी 6 जजों को यह मुआवजा चुकाने का निर्देश दिया था।
  • 31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार जस्टिस करनन कोर्ट में पेश हुए लेकिन वह कोर्ट मे जजों से उलझते नजर आए।
  • आज सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस करनन की दलीलें और कोर्ट का जवाब
  • जस्टिस करनन ने खुद को प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों पर बहाल किए जाने की अपील की। कोर्ट ने उनकी यह मांग खारिज कर दी और सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के मामले में चार हफ्ते में जवाब देने का आदेश दिया।
  • कोर्ट में करनन ने अपनी न्यायिक शक्तियों की बहाली न किए जाने का विरोध किया और कहा कि वह अगली सुनवाई के दिन सुप्रीम कोर्ट में पेश नहीं होंगे।
  • उन्होंने कोर्ट को बताया ‘मैं संवैधानिक पद भी संभाल रहा हूं। मेरी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई गई है और मेरा पक्ष सुने बिना ही मेरा काम मुझसे ले लिया गया।’
  • जस्टिस करनन ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उन्हें कामकाज पर लौटने की इजाजत दी जाए नहीं तो वह पहले की तरह सामान्य नहीं हो पाएंगे। जिस पर कोर्ट ने कहा कि यदि वह (जस्टिस करनन) जवाब देने के लिए ‘मानसिक तौर पर चुस्त-दुरुस्त नहीं हैं’ तो वह मेडिकल रिकॉर्ड पेश कर सकते हैं। प्रत्युत्तर में जस्टिस करनन ने कोर्ट से कहा, ‘मुझे कोई मेडिकल सर्टिफिकेट दिखाने की जरूरत नहीं है।’
  • कोर्ट ने कहा कि जस्टिस करनन की दिमागी हालत साफ नहीं हो रही। वह नहीं समझ पा रहे कि वह असल में क्या कर रहे हैं? हालांकि, अटॉर्नी जनरल ने कहा किकरनन को पता है कि वह क्या कर रहे हैं।

इससे पहले भी रहा विवादों से नाता 

2016 में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम से कोलकाता हाईकोर्ट में ट्रांसफर किए जाने के आदेश पर जस्टिस करनन ने कहा था कि उन्हें दुख है कि वह भारत में पैदा हुए हैं और वह ऐसे देश में जाना चाहते हैं जहां जातिवाद न हो। कलकत्ता हाईकोर्ट से पहले जस्टिस करनन मद्रास हाईकोर्ट में तैनात थे।

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