Anya Smachar

हृदयनारायण दीक्षित निर्विरोध चुने गए यूपी विधानसभा के अध्यक्ष

निर्विरोध चुने गए यूपी विधानसभा के अध्यक्ष

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की 17वीं विधानसभा के अध्यक्ष के तौर पर गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता हृदयनारायण दीक्षित को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। इस पद के लिए किसी और ने पर्चा नहीं भरा था।





दीक्षित ने बुधवार को नामांकन पत्र के सात सेट जमा कराये थे। इसके साथ ही उनके समर्थन में सभी अलग-अलग दलों के नेताओं ने प्रस्तावक और समर्थक के रूप में हस्ताक्षर किए थे। गुरुवार को विधानसभा अध्यक्ष का पदभार ग्रहण करने के बाद प्रदेश सरकार के मंत्रियों, विधायकों सहित सभी दलों के नेताओं ने उन्हें बधाई दी।

हृदयनारायण दीक्षित उन्नाव की भगवंत नगर विधानसभा से चुनाव जीते हैं। वह उन्नाव के पुरवा तहसील के लउवा गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने गृह जनपद में विभिन्न जनमसभाओं को लेकर कई आन्दोलन किए। जीवन के उतार-चढ़ाव और संघर्षों का सफर तय करते हुए अब विधानसभा के सर्वोच्च आसन तक पहुंचे हैं।

वेद और भारतीय संस्कृति का गहरा अध्ययन करने वाले दीक्षित की इन विषयों पर कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, वहीं वह स्तम्भकार भी हैं और अब तक उनके चार हजार आलेख विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अलावा वह पत्रकारिता जगत के कई सम्मानों से भी नवाजे जा चुके हैं।

दीक्षित का राजनीतिक कैरियर

  • 1972 में पहली बार जिला परिषद उन्नाव के सदस्य बने
  • 1985 में पहली बार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़कर विधायक बने थे
  • 1989 में जनता दल से जीतकर विधानसभा पहुंचे
  • 1991 में दोबारा जनता पार्टी से चुनाव जीते
  • 1993 में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में जीतकर विधानसभा पहुंचे
  • सपा-बसपा गठबन्धन सरकार में 1995 में संसदीय कार्य एवं पंचायतीराज मंत्री रह चुके हैं
  • 2010 से जून 2016 तक भाजपा विधान परिषद सदस्य और दल के नेता भी रहे
  • 2017 में भाजपा से चुनाव लड़े और अब विधानसभा के अध्यक्ष बनाए गए हैं

बात यदि भाजपा संगठन की करें तो हृदयनारायण दीक्षित उन्नाव के जिलाध्यक्ष से लेकर प्रदेश उपाध्यक्ष, प्रवक्ता और राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य भी रह चुके हैं। वहीं आपातकाल के दौरान वह 19 महीने जेल में भी रहे थे। दीक्षित की छवि न सिर्फ एक बेदाग नेता के रूप में हैं, बल्कि वह सभी दलों के बीच बेहद लोकप्रिय भी हैं और उनका सम्मान भी सभी दलों के नेता करते हैं।

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