Anya Smachar

डोनाल्ड ट्रम्प ने किया भारी कर कटौती का प्रस्ताव

गैरी कोहन

वाशिंगटन। अमेरिका में आयकर और कार्पोरेट कर की उच्चतम दर 35 प्रतिशत और न्यूनतम दर 10 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है। इन दोनों के बीच की तीसरी दर 25 प्रतिशत होगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने कार्यकाल के सौ दिन के भीतर बुधवार को आधिकारिक तौर पर मौजूदा आयकर के सात स्लैब को घटाकर नए प्रस्तावों में मात्र तीन किए जाने की घोषणा की है।





यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में वित्त मंत्री मुचिन और ह्वाइट हाउस के मुख्य आर्थिक सलाहकार गैरी कोहन ने बुधवार को इस आशय की घोषणा की। बताया जाता है कि इस प्रस्ताव के मूर्त रूप लेने पर आर्थिक सुधार के मामले में ट्रम्प मोदी को भी पीछे छोड़ देंगे।

डोनाल्ड ट्रम्प

डोनाल्ड ट्रम्प

प्रवासी भारतीय आईटी पेशेवरों तथा चिकित्सकों को काफी लाभ होने की उम्मीद

उल्लेखनीय है कि इन कर प्रस्तावों से प्रवासी भारतीय आईटी पेशेवरों तथा चिकित्सकों को पहली अथवा दूसरी कर स्लैब के तहत रहने से काफी लाभ होने की उम्मीद जताई जा रही हैं। अमेरिका में सामान्यतया गैर स्नातक कर्मी को 25 हजार से 36 हजार डालर प्रतिवर्ष वेतन मिलता है और उनसे 10 प्रतिशत आयकर लिए जाने का अनुमान है। इसके विपरीत स्नातक, आईटी पेशेवर, शिक्षक, कलाकार अर्थात एच 1 बी वीजा पर काम करने वाले कर्मी को प्रति वर्ष 42 हजार से 60 हजार डालर वेतन मिलता है। अमेरिका में करीब 47 प्रतिशत लोग आयकर देते हैं।

डेमोक्रेटिक पार्टी ने इसे अमीरों को लाभ पहुंचाने वाला बताया

हालांकि प्रस्ताव में इसका उल्लेख नहीं है कि ये दरें कितनी-कितनी आय पर लगाई जाएंगी, लेकिन इस कर प्रस्ताव को अभूतपूर्व बताया जा रहा है। पहले आयकर की उच्चतम दर 39.6 प्रतिशत थी। इन प्रस्तावों पर कांग्रेस की अनुमति लिया जाना शेष है, फिर भी, प्रतिपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जाहिर करते हुए इसे अमीरों को लाभ पहुंचाने वाला बताया है।

ह्वाइट हाउस के मुख्य आर्थिक सलाहकार गैरी कोहन और वित्त मंत्री मुचिन ने यह नहीं बताया कि कर की दरों में कटौती से होने वाले राजस्व के नुकसान की भरपाई कैसे होगी। लेकिन अनुमान है कि इससे अगले दस सालों में सरकारी खजाने को दो खरब डालर अर्थात 240 अरब डालर प्रति वर्ष के हिसाब से नुकसान होगा।

घर खरीदने के लिए ऋण की राशि और दान की रकम पर छूट जारी रहेगी

गैरी कोहेन ने एक सवाल के जवाब में कहा कि आम लोगों की जेब में नकदी बचने से खर्चे होंगे, कामकाज बढ़ेगा, रोजगार बढ़ेगा और अंतत: देश का आर्थिक विकास होगा। उनका कहना था कि पहले की भांति घर खरीदने के लिए ऋण की राशि और दान की रकम पर छूट जारी रहेगी।

ह्वाइट हाउस की ओर से जारी एक बयान में इस बात पर जोर दिया गया है कि सभी कार्पोरेट हाउस को विदेशों में जमा उनकी अकूत धनराशि को स्वदेश लाने पर उन्हें केवल एक बार कर अदा करना होगा और कांग्रेस में इस प्रस्ताव पर चर्चा के बाद ऐसे धन पर कर की राशि का निर्धारण किया जाएगा। इसके अलावा प्रस्ताव में एस्टेट कर में पूरी छूट दिए जाने का भी प्रस्ताव है।

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