Anya Smachar

युद्ध अपराधी को फांसी देने की मांग खारिज

ढाका: बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट ने युद्ध अपराधों के लिए जमात-ए-इस्लामी के नेता दिलवर होसैन सईदी की सजा के खिलाफ पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी और उसकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। बांग्लादेश की वेबसाइट बीडी न्यूज 24 के मुताबिक, दिलावर के अधिवक्ता अदालत से उनकी रिहाई की मांग कर रहे थे, जबकि सरकारी वकील उन्हें फांसी की सजा देने की मांग कर रहे थे।





दिलवर के अधिवक्ता तनवीर अल अमीन ने बताया कि अदालत ने दोनों पक्षों की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। गौरतब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने साल 2014 के अपने फैसले पर एक बार फिर मुहर लगा दी। अदालत ने 1971 के संघर्ष के दौरान किए गए अत्याचारों के लिए दिलवर की फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दी थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने फांसी की सजा उम्रकैद में बदली थी

बांग्लादेश में साल 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान अत्याचार और दमनकारी कार्रवाई करने के लिए जमात-ए-इस्लामी के पांच नेताओं को फांसी पर लटकाया जा चुका है। बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (International Crimes Tribunal of Bangladesh) ने साल 2013 में दिलावर को भी फांसी की सजा दी थी। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इसे उम्रकैद में बदल दिया था। दिलवर और जमात के अन्य सदस्यों पर आजादी समर्थकों के साथ बलात्कार करने के अलावा हत्या, लूट, उत्पीड़न के दोष साबित हुए थे।

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