Anya Smachar

विश्व के 100 देशों पर साइबर हमला, मांगी फ़िरौती

नई दिल्ली: यूरोप और विश्व के 100 देशों पर साइबर हमला हुआ है। साइबर हमले के शिकार कुछ संगठन और कंपनियां हुई हैं। ब्रिटेन के अलावा अमेरिका, चीन, रूस, स्पेन, इटली, वियतनाम और कई अन्य देशों में ‘रैनसमवेयर’ साइबर हमलों की खबर है। प्रभावित कई संगठनों ने कंप्यूटर्स के लॉक होने और फ़िरौती की मांग वाले स्क्रीनशॉट्स शेयर किए हैं।





ब्रिटेन में आईटी विशेषज्ञ ज़ोर-शोर से नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) के कंप्यूटरों को इस साइबर हमले से छुड़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ब्रिटेन की साइबर सुरक्षा एजेंसी के चीफ कीयरन मार्टिन ने कहा कि वह अपनी पूरी ताकत झोंककर इस बेहद अहम सेवा को बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं।

हालात सुधरने में थोड़ा वक्त लगेगा

मार्टिन ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘यह समझना ज़रूरी है कि साइबर हमले दूसरे तरह के अपराधों से अलग होते हैं। कई बार वह बहुत तकनीकी और अस्पष्ट होते हैं। इसलिए वह प्रोग्राम कैसे काम करता है, उसके पीछे कौन है और उसका असर क्या होगा, यह समझने में थोड़ा वक़्त लग सकता है।’

निशाने पर ब्रिटेन की स्वास्थ्य सेवाएं

एक साइबर विशेषज्ञ के मुताबिक, यह बहुत बड़ा साइबर हमला है। उन्होंने ट्वीट किया कि उन्होंने इसके बदले में बिटकॉइन मांगने के 36,000 मामलों का पता लगाया है। ये ‘वॉनाक्राइ’ या इससे मिलते-जुलते नाम से किए गए हैं।

ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) इससे बुरी तरह प्रभावित हुई है और मरीजों के ऑनलाइन रिकॉर्ड पहुंच के बाहर हो गए हैं। इन हमलों के बाद एक प्रोग्राम ने हज़ारों जगहों के कंप्यूटर्स लॉक कर दिए और पेमेंट नेटवर्क ‘बिटकॉइन’ के ज़रिये 230 पाउंड (करीब 19 हज़ार रुपये) की फ़िरौती मांगी।

क्या है रेनसमवेयर वायरस

रेनसमवेयर एक कंप्यूटर वायरस है जो कंप्यूटर्स फ़ाइल को बर्बाद करने की धमकी देता है। इसके माध्यम से धमकी दी जाती है कि अगर अपनी फ़ाइलों को बचाना है तो फीस चुकानी होगी। ये वायरस कंप्यूटर में मौजूद फ़ाइलों और वीडियो को इनक्रिप्ट कर देता है और उन्हें फिरौती देने के बाद ही डिक्रिप्ट किया जा सकता है।

सबसे बड़ी बात रेनसमवेयर वायरस की यह होती है कि इसमें फिरौती चुकाने के लिए समय सीमा निर्धारित की जाती है और अगर समय पर पैसा नहीं चुकाया जाता है तो फिरौती की रकम बढ़ जाती है। फिलहाल ये वायरस स्पैम ई-मेल के जरिये जॉब ऑफर, इनवायसेस, सिक्योरिटी वार्निंग्स और अन्य संबंधित फाइल्स की शक्ल में पहुंच रहा है। एक बार इसके कारण कंप्यूटर के करप्ट होने के बाद इसको दुरुस्त करने के लिए और फिर से एक साथ प्राप्त करने के लिए 300-600 डॉलर तक की फिरौती मांगी जा रही है।

अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी ने किया था रेनसमवेयर वायरस को विकसित

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, इस प्रोग्राम को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने विकसित किया था। इसको चुराकर हैकरों ने इस तरह का बड़ा साइबर हमला किया है। साइबर विशेषज्ञ रिच बार्जर के मुताबिक यह अब तक का सबसे बड़ा रैंसमवेयर हमला है जिसको साइबर समुदाय हालिया दौर में देखा है। एक बार यदि यह मालवेयर वायरस कंप्यूटर सिस्टम में प्रवेश कर जाता है तो फिर इसको रोकना बहुत मुश्किल होता है।

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