Anya Smachar

आडवाणी समेत 10 पर चलेगा आपराधिक साजिश का मुकदमा

आडवाणी-मुरली-मनोहर-जोशी

नई दिल्ली। बाबरी विध्वंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती को तगड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने मामले में आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 13 लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। हालांकि, इनमें से तीन का निधन हो चुका है तो अब 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा चलेगा।





इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इन नेताओं के खिलाफ रायबरेली की कोर्ट में चल रहे सभी मामले लखनऊ ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि दो महीने में सारे मामले लखनऊ ट्रांसफर हो जाएं और ट्रायल शुरू हो जाए। सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ के सेशन कोर्ट को आदेश दिया है कि दो साल में ट्रायल पूरा करें और मामले की रोजाना सुनवाई करें तथा सुनवाई करने वाले जज का तबादला नहीं किया जाए।

राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह को संवैधानिक छूट

जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस पीसी घोष की बेंच ने राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह को संवैधानिक छूट देते हुए आदेश दिया कि उनके खिलाफ मामला तब तक नहीं चलाया जाए जब तक वह राज्यपाल के पद पर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह अभियोजन पक्ष के सभी गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करें। कोर्ट ने चार सप्ताह के अंदर इन सभी आरोपियों के खिलाफ साजिश की धाराएं लगाने का आदेश दिया।

सीबीआई ने क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट में

आपको बता दें कि पिछले छह अप्रैल को अयोध्या में बहुचर्चित बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा था कि सभी चौदह आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने की धाराएं हटा दी गई​ हैं। हम चाहते हैं कि उन धाराओं को फिर से लगाया जाए। सीबीआई ने कहा कि उन्हें छोड़ा नहीं जा सकता है। सीबीआई और सीआईडी ने अलग-अलग जांच की लेकिन किसी में आपराधिक साजिश रचने की धाराएं नहीं लगाई गई।

लखनऊ का मामला ढांचा गिराए जाने से जुड़ा जबकि रायबरेली का मामला भीड़ को उकसाने का

जस्टिस​ नरीमन ने छह मार्च को ही संकेत दे दिया था कि 13 नेताओं के खिलाफ दोबारा सुनवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ ट्रायल में हो रही देरी पर चिंता जताई थी।  लखनऊ वाले मामले में बीजेपी और संघ परिवार के बड़े नेताओं के ऊपर से साज़िश की धारा हटाई जा चुकी थी जिसके खिलाफ सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। लखनऊ का मामला ढांचा गिराए जाने से जुड़ा है जबकि रायबरेली का मामला भीड़ को उकसाने का है। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से रायबरेली के मामले भी लखनऊ ट्रांसफर हो जाएंगे।

इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था। हाईकोर्ट ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, केंद्रीय मंत्री उमा भारती, राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी सहित अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त किया था।

लखनऊ वाले मामले में अब तक 195 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं जबकि करीब आठ सौ गवाहों के बयान दर्ज होने बाकी हैं। रायबरेली वाले मामले में 57 गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं जबकि एक सौ पांच गवाहों के बयान दर्ज होने हैं। आडवाणी, जोशी और छह अन्य नेताओं के खिलाफ रायबरेली की कोर्ट में ही भड़काऊ भाषण देने के मामले चल रहे हैं।
गौरतलब है कि सीबीआई की याचिका के साथ महाफिज-मस्जिद-वा-मकाबिर के अध्यक्ष हाजी महबूब अहमद ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले में वकील नीरज किशन कौल ने सीबीआई की ओर से जबकि केके वेणुगोपाल ने बीजेपी नेताओं की ओर से अपनी दलीलें पेश की थीं।

 

Comments

Most Popular

To Top