Anya Smachar

6-7 महीने में पेपरलेस हो जाएगा सुप्रीम कोर्ट : CJI जेएस खेहर

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट अगले 200 दिन में पूरी तरीके से डिजिटल होने की तैयारी कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस जेएस खेहर ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट अगले 6 से 7 महीने में पूरी तरह पेपर लेस हो जाएगा। जस्टिस डीएस चंद्रचूड और संजय के कौल ने कहा, हम सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ही ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के रिकॉर्ड लेंगे।





सुप्रीम कोर्ट में नए मामले दर्ज किए जाने की जरूरत नहीं होगी

जस्टिस खेहर ने कहा कि शीर्ष अदालत ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट के रिकार्ड्स इलेक्ट्रॉनिक तरीके से एकत्र करेगी तथा सुप्रीम कोर्ट में नए मामले दर्ज किए जाने की जरूरत नहीं होगी। ऐसा होने पर सुप्रीम कोर्ट में पक्षकारों और वकीलों को याचिका दायर करने के लिए मोटे-मोटे पेपर बुक जमा नहीं करने होंगे। उन्हें केवल अपनी याचिका का वह ग्राउंड बताना होगा जिसके आधार पर वे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दे रहे हैं।

हर साल औसतन 70 हजार मामले सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आते हैं

गौरतलब हो कि हर साल औसतन 70 हजार मामले सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आते हैं। हर केस में ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले की कॉपी, संलग्नित दस्तावेज और रेफरेंस पेपर मिलाकर 100 पेज से ज्यादा की फाइल हो जाती है। इसके अलावा तमाम लॉ फर्म हैं जो लगातार केस फाइल करते रहते हैं। समूह में याचिकाएं आती हैं, इस तरह ये सब मिलाकर कभी कभी 200 से ज्यादा पेज की फाइल भी बन जाती है।

इस तरह हर साल सुप्रीम कोर्ट में 70 लाख पेज सफेद कागज जो कि सामान्य A-4 शीट से ज्यादा बड़ा होता है, जमा हो जा रहा है। इस तरह अगर मुख्य न्यायाधीश के फैसले को लागू करने में सुप्रीम कोर्ट प्रशासन सफल रहा तो देश बड़ी तादाद में कागज और पर्यावरण को बचाने में सफल हो जाएगा।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने कोर्ट द्वारा एडवोकेट को सीनियर एडवोकेट नामित किए जाने पर एकसमान दिशानिर्देश जारी किए जाने संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पेपरलेस कामकाज संबंधी फैसले का खुलासा किया। दरअसल, वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा था कि वृहद पीठ को मामले का जल्द से जल्द निस्तारण करना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली को डिजिटल करने के लिए ट्रांसपेरेंट और स्पष्ट दिशा निर्देश बनाने की मांग की थी।

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