Anya Smachar

कतर पर प्रतिबंध से परेशान हैं छह लाख भारतीय

दोहा। कतर पर छह मुस्लिम देशों (सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन, यमन, लीबिया और संयुक्त अरब अमीरात) की ओर से प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत को वहां रहे छह लाख भारतीयों की चिंता सताने लगी है। नतीजा है कि भारत खाड़ी देशों में शांति का माहौल चाहता है।





उल्लेखनीय है कि खाड़ी देशों में करीब 70 लाख भारतीय रहते हैं जो अक्सर कतर एयरवेज के विमान का इस्तेमाल करते हैं। कतर पर प्रतिबंध लगने के बाद उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि कम-से-कम 14 भारतीय शहरों से क़तर एयरवेज़ की सीधी फ्लाइट दुबई, दोहा और कुवैत जाती थी और इनका किराया काफ़ी कम रहता था। ऐसे में हज़ारों लोग इससे प्रभावित होंगे।

खाड़ी देश

विदित हो कि खाड़ी देशों में भारत के कई करोड़पति व्यापारियों का क़तर में काफी निवेश है। ऐसे में ज़मीन, हवा और समंदर बॉर्डर बंद करने से इन लोगों का काफी नुक़सान होगा। यही वजह है कि भारत चाहता है कि यह मसला सुलझ जाए।

  • ट्रम्प ने कतर के साथ राजनयिक संबंध तोड़ने की कार्रवाई का किया समर्थन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कतर के साथ राजनयिक संबंध तोड़ने की छह अरब देशों की कार्रवाई का समर्थन किया है और कहा कि उनके एशिया दौरे का फायदा मिल रहा है। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट से मिली।
विदित हो कि सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने कतर पर चरमपंथियों का वित्त पोषण करने और उन्हें पनाह देने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह मुस्लिम ब्रदरहुड और इस्लामिक स्टेट से लेकर ईरान समर्थित हुथी विद्रोहियों के तमाम आतंकी समूहों की मदद कर रहा है।

ट्रम्प ने ट्वीट कर कहा है, “पश्चिम एशिया के हाल के दौरे में मैंने कहा था कि कट्टरपंथी विचारधारा का अब और वित्त पोषण नहीं किया जा सकता है। सऊदी अरब में वहां के शाह और 50 देशों के नेताओं से मिलने का फायदा हुआ है जिसे देखकर अच्छा लग रहा है।” विदित हो कि उन्होंने कहा था कि वह वित्त पोषण, चरमपंथ पर कड़ा रुख अपनाएंगे और उनका साफ संकेत कतर की ओर था।

  • कतर से सहानुभूति दिखाने पर यूएई में 15 साल की कैद

आबू धाबी। संयुक्त अरब अमीरात ने कतर के साथ सहानुभूति जताने को लेकर अपने नागरिकों को चेतावनी दी है और कहा है कि अगर किसी ने क़तर के लिए सहानुभूति जताई, तो उसे 15 साल जेल की सज़ा दी जाएगी।

विदित हो कि गत सोमवार को सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन, यमन, लीबिया और संयुक्त अरब अमीरात ने क़तर के साथ अपने राजनयिक संबंध तोड़ने का ऐलान किया था। तभी से क़तर अपने नागरिकों के लिए खाने-पीने की सामग्री हवाई मार्ग के ज़रिए ईरान और तुर्की से मंगा रहा है।

बीबीसी के अनुसार, मध्य-पूर्व के देशों के बीच बनी इस ताज़ा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए जर्मनी के विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि यह मध्य पूर्व की राजनीति का ‘ट्रम्पिफ़िकेशन’ है, जो इन देशों के लिए सही नहीं है।

हालांकि, क़तर और सऊदी अरब के बीच इस संकट को हल करने का प्रयास लगातार जारी है। कुवैत के अमीर इन देशों के बीच मध्यस्थता का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन क़तर के विरोध में खड़े सभी खाड़ी देशों का आरोप है कि क़तर लगातार कट्टरपंथियों का समर्थन कर रहा है, जो उनके लिए खतरा हैं।

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