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CRPF की सटीक कार्रवाई पर दो शब्द

संजय वोहरा (प्रधान संपादक)

केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और ख़ासतौर से इसकी 45वीं वाहिनी ने बांदीपोरा में जो कर दिखाया, उसने इस संगठन का ही मान नहीं बढ़ाया, जम्मू-कश्मीर में तैनात तमाम वर्दीधारियों को एक बड़ा सन्देश भी दिया।बहादुरी-होशियारी और चुस्ती का लगातार संचार हो तो बदनीयत पड़ोसी के ढुलमुल तरीके से ट्रेंड लड़ाकुओं को उनकी औकात में लाना कोई मुश्किल काम नहीं है। इस ऑपरेशन में जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ बेहतर तालमेल की सकारात्मकता में चार चाँद और लगा दिए।





हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी ‘कार्यक्रमों’ में जो इजाफा हुआ और उसके साथ ही नक्सलियों की हरकतों से भारतीय सुरक्षा बलों को जैसे कमजोर या घायल देखा या महसूस किया गया, बांदीपोरा में उस जख्म पर मरहम लगाने जैसा असर भी दिखाया है। वैसे इस बटालियन का नाम बस तीन महीने पहले ही उस शेर ने दो बार रोशन किया जो चेतन चीता कहलाता है। नौ गोलियां खाकर भी आतंकियों को सबक सिखाने के साथ उसने मौत को भी मात दी थी। चेतन तब इसी बटालियन को कमांड करते थे।

सीआरपीएफ-45वीं-वाहिनी

सीआरपीएफ 45वीं वाहिनी की जवाबी कार्रवाई में ढेर हुए चारों आतंकी

इस संचार को बढ़ाने में उन अधिकारियों का भी योगदान रहा जिन्होंने बहादुरी के इस कारनामे में देशभक्ति भी घुलने दी। पूरे भारत में सुबह-सुबह टीवी पर ‘भारत माता…’ का उद्घोष सुना गया। कुछ पेशेवर इसे Unprofessional जरूर कह सकते हैं लेकिन आतंकवाद से निपट रहे सुरक्षा बलों के लिए ये एक तरह की शाबाशी देने वाला काम ही था। खासतौर से तब जब इसके प्रचार की बारी आई।

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